भोपाल। कस्टम हायरिंग एक ऐसी योजना जिसके तहत जिन क्षेत्रों में किसान आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं जो कृषि यंत्र व संसाधन अपनी खेती किसानी के लिए नहीं खरीद सकते उनके लिए एक एजेंसी के माध्यम से चुनिंदा लोगों से आवेदन मांगे जाते हैं उनकी ट्रेनिंग की जाती है और उन्हें लाखों की सब्सिडी देकर लॉटरी सिस्टम के तहत कृषि यंत्र सस्ते दामों में उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि वे जरूरतमंद किसानों को कमतर दरों पर किराए पर वह यंत्र अपनी खेती करने के लिए दे सकें।
मगर क्या असल में ऐसा होता है?? आइये समझते हैं।
सबसे पहले लोगों से आवेदन मांगे जाते हैं लॉटरी सिस्टम के तहत उनको आवंटन होता है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि आवेदन करने के बाद भी केवल राजनेताओं व अधिकारियों के चहेते लोगों को और ऐसे लोग जो कुछ दान-दक्षिणा दे सकते हैं केवल उन्हीं का लॉटरी में नंबर आता है और बिना लिए-दिए या बिना जान-पहचान के अगर किसी का लॉटरी में नम्बर आ गया तो भी दान-दक्षिणा दिए बगैर गाड़ी आगे नहीं बढ़ती।
फिर जब लॉटरी खुल जाती है तो वही चहेते लोग और सक्षम लोगों को लाखों की सब्सिडी देकर ट्रैक्टर,ट्रॉली,सीड ड्रिल इत्यादी तमाम कृषि यंत्र उपलब्ध करा दिए जाते हैं और 5 दिन की ट्रेनिंग भी होती है जिसके नाम पर वह लॉटरी खुलती है उसकी।
फिर गांव में जाकर बोर्ड लगा देते है जिसको भी किराए पर कृषि यंत्र ट्रेक्टर ट्रॉली इत्यादि चाइए वो ले जाये पर क्या असल में ऐसा होता है ??
मुश्किल से 10% ऐसा हो पाता है और बाकी जिस प्रकार वेयर हाउस में सब्सिडी डकार कर बड़े-बड़े लोग लाभ उठाते हैं उसी प्रकार कस्टम हायरिंग में अपनी जुगाड़े बिठाकर नेता और अधिकारी व उनके चहेते,करीबी व चाटुकार और व्यापारी ऐसे लोग सब्सिडी का लाभ उठाते हैं,पूरी सब्सिडी डकार जाते हैं। और अंतिम पंक्ति में खड़ा वह गरीब किसान जिसके लिए योजना लाई गई है वह छोटा किसान जिसकी सहायता के लिए योजना लाई गई है वह इधर-उधर से उधार लेकर हमेशा की तरह अपनी खेती करता रहता है और कर्ज में दबता रहता है।
कुछ महानुभव तो इस योजना के तहत ट्रैक्टर से लेकर कृषि यंत्र तक का आवेदन करते हैं आर लॉटरी खुलने पर केवल ट्रेक्टर-ट्रॉली लेकर बाकी यंत्रों का पैसा उन्हें बनाने वाली कंपनियों के साथ मिलकर बिना यंत्र लिए कागज़ी खाना पूर्ति कर खा जाते हैं। व्यापक भ्रष्टाचार में लिप्त यह योजना जिसमें सबका मिल जुला खेल है जिसमें मिलकर सब लूट मचाते हैं।
यही है साहिबान कहानी कस्टम हायरिंग की।
यदि सही से जांच हो तो कई बड़े नेताओं से लेकर,अधिकारी व सक्षम लोगों के पास इसी योजना के तहत ट्रेक्टर व अन्य कृषि यंत्र मिलेंगे जिनका उन्होंने कभी भी गरीब किसानों को लाभ नहीं होने दिया।
तो माननीय कृषि मंत्री माननीय कमल पटेल जी,
क्या आप इसकी निष्पक्ष जांच कराएंगे??
या फिर पत्रकार वार्ता कर अपनी पीठ थपथपा जूठी वह वही लूट जैसा चलता रहा है चलने देंगे।
क्या आप वे आंकड़े सार्वजनिक कर सकते हैं, कि कितने किसानों को इसके तहत कमतर किराए पर कृषि यंत्र मिले और कहा-कहा मिले ???
क्या सरकार ऐसा कोई आंकड़ा एकत्रित भी करती है ??
या बस केवल सक्षम लोगों को सब्सिडी देकर उसे भूल जाती है।
क्योंकि अब तक तो यही हुआ है कि सरकार किसी की भी रहे बस एक ही नारा एक ही काम लूटो खूब लूटो जमकर लूटो मिलकर लूटो जबरदस्त लूटो और जब तक हो सके तब तक लूटो।
