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साहित्‍य अकादमी, मध्‍यप्रदेश संस्‍क़ति परिषद द्वारा गमक श्रंखला में शौर्य गाथा की नाटय प्रस्‍तुति एवं निवाड्ी कवियों का रचनापाठ

भोपाल। साहित्‍य अकादमी, मध्‍यप्रदेश संस्‍क़ति परिषद द्वारा गमक श्रंखला में प्रस्तुति की शुरूआत उज्जैन की कलाकार पलक पटवर्धन और साथी कलाकार साहित्यिक सांगीतिक प्रस्तुति में नाटक शौर्य गाथा दी गई। शौर्य गाथा प्रस्तुति के अंतर्गत आजादी की कहानी का वर्णन किया है, जिसमें तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, बाल गंगाधर तिलक,भगत सिंह ,राजगुरु, चन्द्रशेखर आजाद, मंगल पांडे,वीर सावरकर जैसे महान क्रान्तिकारियों की गाथा का वर्णन किया। अगली प्रस्तुति रचनापाठ की रही जिसमें निमाड़ी बोली पर काव्य गोष्ठी में रचनाकार श्री विजय जोशी शीतांशु (महेश्वर) ने स्वच्छता अभियान पर आधारित निमाड़ी रचना  निरमल  अपने गांव बणावां, सुरिमल आरती थाल सजावां, चलो ओ, काकी चलो ओ, भाभी स्वच्छता को अलख जगावां..., श्री महेश जोशी (खरगोन) ने एक निमाड़ी परिवार की कथा व्यथा पर आधारित रचना रड़ी कूड़ी ने बीत्यो स्यालो, हाल चाल सब अच्छा छे..., श्री हरीश दुबे (महेश्वर) ने निमाड़ी में नर्मदा जी की महिमा का सुन्दर बखान करते हुए सुनाया कि  नरबदा मैया तू महाराणी छे, बड़ों मीठो मीठो थारो यो पाणी छे..., श्री प्रदीप नवीन (सनावद) ने  जीवन में मिठास घोलती निमाड़ी बोली पर रचना प्रस्तुत की। अंत में कवि श्री सदाशिव कौतुक (गोगावां) भणुज कि नई बेटा, वो तू मखे बोल..., नई तो‌ होटल में  आप बसी खंगोल..., ने रचना को सुनाया।