सरकार की मंशा के बाद पीएचक्यू ने अफसरों से मांगे हिंदी शब्द
भोपाल। जल्द ही पुलिस महकमा फारसी और उर्दू के कठिन और कम प्रयोग होने वाले शब्दों जैसे देहाती नालसी, हिकमतअमली और दस्तयाब के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में प्रयोग होने वाले आम बोचचाल वाले हिंदी शब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर देगा। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस यूनिट्स से सात दिनों में फारसी और उर्दृ के करीब 350 शब्दों के बजाय हिंदी के शब्दों का सुझाव मांगा है।
इस बारे में शासन की मंशा के अनुसार पीएचक्यू की रिसर्च एंड डेवलपमेंट ब्रांच की ओर से पुलिस की आल यूनिट्स को एक प्रोफार्मा के साथ पत्र भेजा गया है। इसमें उदर्् और फारसी के अभी पुलिस में प्रयोग होने शब्दों की जगह हिंदी के शब्द सुझाने के लिए कहा गया है। यह शब्द ऐसे होने चाहिए, जोकि आसानी से आम आदमी की समझ में आ सकें। इसके बाद पुलिस अधिकारियों द्वारा सुझाए गए शब्दों का परीक्षण करके फायनल ड्राफ्ट बनाकर गृह विभाग को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
हाईकोर्ट जता चुका है आपत्ति
फारसी और उर्दू के अप्रचलनशील और सामान्य व्यक्ति की समझ में नहीं आने वाले शब्दों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट आपत्ति जता चुका है। हाईकोर्ट ने इस बारे में निर्देश दिए थे कि आम आदमी की समझ में आने वाले शब्दों का प्रयोग होना चाहिए। इसके बाद ही राज्यों में इसको लेकर हलचल शुरू हुई।
कई शब्द अप्रचलनशील हो चुके
थाना स्तर पर सर्वाधिक प्रयोग होने वाले फारसी और उदर्् के शब्दों के बजाय सामान्य हिंदी के शब्दों का प्रयोग काफी हद तक होने लगा। जैसे गश्त के बजाय भ्रमण, इत्तला दी गई की जगह सूचना दी गई।
ऐसे होगा बदलाव
देहाती नालसी-प्रथम सूचना (जीरो रिपोर्ट)
दस्तयाब-ढूंढ निकाला
परवाना-सचेत पत्र
खारजी-समाप्ति
इस्तगासा-परिवाद
ुइत्तला-सूचना
रोजनामचा-दैनंदिनी
सान्हा-प्रविष्टी
मुलजिम-आरोपी
मुजरिम-अपराधी
इजरा-कार्यपालन
कता-संख्या
पतारसी-विवेचना
प्यादा-सूचनाकर्मी
मुल्तवी-स्थगित
शासन की मंशा के अनुसार फारसी और उर्दू के कठिन शब्दों की जगह सामान्य बोलचाल वाले हिंदी शब्दों के प्रयोग के लिए पुलिस की आॅल यूनिट्स से 7 दिन में अपने सुझाव निर्धारित प्रोफार्मा में मांगे गए हैं। इसके बाद हिंदी भाषा का फायनल ड्राफ्ट गृह विभाग को भेजा जाएगा।
अनिल कुमार गुप्ता, एडीजी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट