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शिक्षक नहीं सहयोगी बनकर करें विद्यार्थियों का मार्गदर्शन-राज्य मंत्री परमार

भोपाल। स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) और सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षक बनकर नहीं विद्यार्थियों का सहयोगी बनकर उनका मार्गदर्शन करें। विद्यार्थियों में गणित और विज्ञान विषय के प्रति रुचि पैदा करें। मंत्री श्री परमार आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी मे स्कूल शिक्षा विभाग के जि़ला विज्ञान अधिकारियों की एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला के समापन-सत्र को संबोधित कर रहें थे। श्री परमार ने  कहा कि जीवन से जुड़े विज्ञान और गणित के उदाहरण समझाते हुए विद्यार्थियों को इन विषय की उपयोगिता समझाएँ और वैज्ञानिक प्रयोग करने के लिए प्रेरित करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझते हुए विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ प्रेरणा और प्रोत्साहन भी दें।

राज्य मंत्री श्री परमार ने कहा कि वैज्ञानिक प्रयोग भारत की संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। भारत के परंपरागत ज्ञान को वैज्ञानिक कसौटी के आधार पर विद्यार्थियों को समझाएँ। विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए विद्यार्थियों में गौरव का भाव जागृत करें। साथ ही विद्यार्थियों के वार्षिक मूल्यांकन के लिए विज्ञान आधारित गतिविधियों का वर्षभर सतत मूल्यांकन करें। राज्य मंत्री श्री परमार ने सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्र में स्थित प्रत्येक स्कूल की साइंस प्रेक्टिकल लेब का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान बच्चों को प्रयोग में लगने वाले आवश्यक उपकरणों की सूची बनाएँ और उसे राज्य स्तर पर प्रेषित करें।  लेब में हर आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराया जाएगा। 

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा नित्य नवीन उपलब्धियाँ प्राप्त की जा रही हैं। विज्ञान शिक्षण में हमारे शिक्षकों के कार्य राष्ट्रीय स्तर पर प्रति वर्ष इंस्पायर अवार्ड प्रतियोगिता में देखे जा सकते हैं। विगत दो वर्ष में प्रथम पुरस्कार प्रदेश के ग्रामीण अंचलों की बालिकाओं के द्वारा तैयार विज्ञान मॉडल को प्राप्त  हुए हैं। श्रीमती शमी ने अपेक्षा की, कि विज्ञान के प्रयोगात्मक शिक्षण की विधियाँ कक्षा 6वीं से ही शिक्षण में अपनाई जाये। विद्यार्थियों को स्थानीय कल कारखानों का शैक्षिक भम्रण करवाया जाए। उन्हें विभिन्न विज्ञान संस्थानों में प्रवेश की जानकारियाँ उपलब्ध कराई जाएँ और उन संस्थानों में प्रवेश हेतु विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।