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उत्तरप्रदेश के बाद मध्यप्रदेश में निषाद पार्टी की लांचिंग की तैयारी

मप्र की 40 से ज्यादा सीटों पर हवा का रुख तय करता है माझी मछुआ समुदाय

भोपाल। उत्तरप्रदेश में योगी सरकार में सहभागी निषाद पार्टी (निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल) की मध्यप्रदेश में लांचिंग की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उप्र सरकार में मत्स्य पालन मंत्री संजय निषाद की सहमति के बाद विंध्य, चंबल, भोपाल-नर्मदापुरम सहित निमाड़ और मालवा में सदस्यता मुहिम 1 मई मजदूर दिवस से शुरू हो जाएगी। 

इसको लेकर माझी मछुआ संघ का प्रतिनिधि मंडल लखनऊ  में 20 अप्रैल को निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद से मिला। निषाद ने मध्यप्रदेश में पार्टी की लांचिंग के साथ ही मछुआरों की समस्याओं को लेकर संघर्ष शुरू करने का भरोसा दिलाया है। इसके बाद ही बनी रणनीति के तहत मई दिवस से सदस्यता सहित जागरण यात्रा शुरू हो जाएगी। अभी प्रदेश में 50 लाख वोटर्स होने का दावा वंशानुगत माझी मछुआ समुदाय करता है। ऐसे में 

करीब 40 सीटों पर सियासी तस्वीर तय करने में अहम भूमिका में हैं। इसी के चलते उत्तरप्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी पार्टी बनाकर 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से सीटों का बंटवारा किया जा सकेगा। 

इसलिए नई पार्टी की जरूरत

मप्र में नियम हैं कि वंशानुगत मांझी मछुआ समुदाय की सहकारी समितियों को ही मत्स्य पालन और मत्स्याखेट के ठेके दिए जाएंगे। बावजूद अल्पसंख्यक वर्ग के ठेकेदारों ने बोगस सोसायटियों के माध्यम से प्रदेशभर में तालाबों और जलाशयों के ठेके ले रखे हैं। अल्पसंख्यक ठेकेदारों के भ्रष्टाचार में शामिल मछली पालन विभाग के अधिकारियों का विभागीय जांच में फर्जीवाड़ा साबित होने और कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों के आदेश के बाद भी एफआईआर तक नहीं हो रही है। दूसरी ओर रोजी रोटी पर संकट के चलते माझी मछुआ समाज अब अपने खेवनहार के तौर पर निषाद पार्टी को देखने लगा है। 

भोपाल सहित दर्जनभर जिलों में मछली के ठेके वर्ग विशेष के मछली माफिया ने कब्जा कर रखे हैं, जिसकें विभाग के अधिकारी शामिल हैं। इसका जांच में खुलासा होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने और माझी मछुआ समाज के साथ अन्याय के चलते पंरपरागत हिंदूवादी होने के बाद भी अब निषाद पार्टी बना रहे हैं। 

                            दीपक रायकवार, मांझी जनजाति संयुक्त संघर्ष समिति