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अंचल और आंचलिक बोलियों के हितों पर प्रहार : आकाशवाणी का का जन विरोधी निर्णय

देवेन्द्र दीपक, भोपाल।लोक शिक्षण और लोक  रंजन के क्षेत्र  में   आकाशवाणी का अपना  ऐतिहासिक योगदान  रहा  है ।आकाशवाणी  केन्द्र   स्थानीय संस्कृति, स्थानीय  समस्याओं  और संभावनाओं और प्रतिभाओं  को अभिव्यक्ति  का अवसर प्रदान  करते   रहे हैं । 

प्रति दिन  आकाशवाणी  से चालीस  मिनट  का "ग्राम सभा " कार्यक्रम आंचलिक बोली में प्रसारित  होता है जिसमें  आंचलिक  बोली मेंआंचलिक संस्कृति, आंचलिक समस्याओं ,आंचलिक  विकास की योजनाओं का समावेश  रहता  है। ग्रामीण जीवन से सम्बद्ध कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद,उपज, जल ,स्वच्छता, कुटीर उद्योग  आदि   विषयों  पर  विशेषज्ञ संवाद  करते  हैं , समस्याओं के  व्यावहारिक  पहलू पर चर्चा कर समाधान  सुझाते  हैं ।लोक संगीत  और लोक गीत  भी अंचल की जनता  सुन पाती है । कुल सार --अंचल की  बोली में  अंचल से अंचल के  हित में आत्मीय  संवाद !उद्देश्य  ग्रामीण विकास  !

प्रसार भारती के अधीन कार्यशील  आकाशवाणी  ने 1 मई 22 से  परम्परा  से चले आ रहे नित्य एक घंटे के अंचल की बोली में ग्राम सभा  का प्रसारण   बंद कर दिया। इसके साथ ही महीने में  एक  बार आंचलिक  बोली  के साहित्यिक  कार्यक्रम  का प्रसारण  भी निरस्त  कर दिया । इन दोनों  कार्यक्रमों को  निरस्त करना जन विरोधी है, विकास विरोधी है !आंचलिक बोली और उसके कलाकारों, गायकों  और साहित्यकारों के हितों पर कुठारघात है।  साथ  ही ग्रामीण  विकास  की  प्रक्रिया  पर भी इसका  विपरीत  प्रभाव पडेगा ।

प्रभावशाली  जनमसंचार और प्रचार प्रसार  के लिए  आंचलिक  बोलियों  का प्रयोग एक काल सिद्ध  सच  है।आंचलिक  बोली के माध्यम  से स्थानीय  जनता  से जो परस्परता  और अपनापन  स्थापित  होता  है उससे  सरकारी  योजनाएं   अंतिम  छोर तक पंहुचती हैं  । इस से सरकार  और जनता  दोनों  लाभान्वित  होते हैं, यह एक मनोवैज्ञानिक   और  समाजशास्त्रीय   शोध-सिद्ध सच्चाई   है । अतः आंचलिक  बोलियों  में  प्रसार सेवाओं के प्रसारण रोकना लोक  तंत्र  के लिए  आत्मघाती  होगा । इस  आदेश  का फलितार्थ  है  आंचलिक बोलियों  का उनके अपने ही अंचल से   निष्कासन ! हमें  यह नहीं भूलना चाहिए  कि कालान्तर में हिंदी के व्यापक हितों  को भी ऐसे निर्णय  प्रभावित  कर सकते हैं । साथ ही राष्टीय एकता के भाव का  क्षरण भी होगा ।

देश  अपना अमृत महोत्सव  मना रहा है ।एक ओर  प्रधानमंत्री  'वोकल फोर लोकल' की बात पर बल दे रहे हैं , दूसरी  ओर आकाशवाणी ऐसे निर्णय  ले रहा है जो  सर्वथा  अंचल के विकास  , अंचल की कला और संस्कृति के हितों  के विरुद्ध  हैं । यह निर्णय अंचलके लोकगायकों,वादकों, कलाकारों  और साहित्यकारों को बरोजगार करेगा । ग्रामीण  विकास अवरुद्ध  होगा मैं  ऐसे किसी  भी निर्णय   को अनुचित और अहितकर   मानता  हूं  जो आकाशवाणी के आंचलिक   बोलियों में  प्रसारित ग्राम सभा के  कार्यक्रमों  को निरस्त  करता है।