Type Here to Get Search Results !

एक अस्पताल.... जहां बीमारी से नहीं, प्यास से ही हो सकती है मरीज की मौत

पेयजल की एक-एक बूंद को तरसता मरीज

वेकोली के कन्हान क्षेत्रीय अस्पताल की शर्मनाक कहानी....

जहां मरीज को मिल रहा नहीं पीने को पानी....

अस्पताल में मरीजों के लिए पेयजल की नहीं है व्यवस्था.....

मरीज को गोली लेने के लिए खरीदना पड़ता है बाज़ार से एक बोतल पानी.....

जनप्रतिनिधिगण, चिकित्सक, अधिकारी और श्रमिक संगठन नेताओं के निकम्मेपन का एक और उदाहरण

जुन्नारदेव, छिंदवाड़ा। जिले के जुन्नारदेव शहर में एक अस्पताल ऐसा है कि जहां पर भर्ती हो रहे मरीज के लिए एक बूंद शुद्ध पेयजल तक मयस्सर नहीं हो पा रहा है। यहां पर भर्ती होने वाले मरीज को डॉक्टर के द्वारा लिखी दवाई को लेने के लिए अस्पताल के बाहर लगी दुकानों से एक बोतल पानी खरीद कर उसे लेना होता है। आपातकालीन परिस्थितियों में यदि डॉक्टर के द्वारा लिखी गई गोली को लिया जाना तत्काल जरूरी हो तो यह संभव है कि व्यक्ति की मौत उसे हुई बीमारी की जगह पानी की प्यास से ही हो सकती है। यह शर्मनाक खबर वेकोली के कन्हान क्षेत्रीय चिकित्सालय से जुड़ी हुई है। करोड़ों रुपयों का कोयला उत्पादन करने वाला कन्हान क्षेत्र यहां उपचार कराने पहुंचे श्रमिकों के लिए बने अस्पताल में मात्र कुछ ही हज़ार रुपयों की विशुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने में असक्षम है। बीते लगभग 15 दिनों से बनी इस घोर लापरवाही पर अब तक किसी भी अधिकारी, चिकित्सक या श्रमिक नेताओं का ध्यान भी नहीं पहुंचा है। यही लापरवाही इस खबर का दूसरा शर्मनाक पहलू है। यहां के चिकित्सक अपने कक्ष में लगे AC की ठंडी-ठंडी हवाओं को खाते हुए कंपनी के जुझारू, कर्मठ, श्रमिकों के जीवन के साथ इस तरह से खेल रहे हैं। इस क्षेत्र के श्रमिक संगठनों के बड़े नेता लगातार अपनी स्वार्थपरक राजनीति में इस तरह लिप्त है कि वह ना ही सिर्फ अपनी कंपनी को नुकसान पहुंचा रहे हैं वरन दलाली कर करके अपना घर भी भर रहे हैं। इस कन्हान कोयला अंचल के सभी श्रमिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी इस क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों की चाटुकारिता में लगातार देखे जा सकते हैं। वह अपने श्रमिक के प्रति नैतिक उत्तरदायित्व की पूर्ति करने के स्थान पर अधिकारियों की चाटुकारिता करते नजर आ रहे हैं। यहां के श्रमिक संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अब संघर्ष की राजनीति को त्याग कर एसी के कमरों में बैठकर अधिकारियों से टेबल के नीचे का एक नया काम शुरू कर दिया है। बस यही कारण है कि अधिकारी वर्ग भी काले हीरे के लिए कभी प्रसिद्ध नुकसान पहुंचा रहा है। यह दुर्भाग्य ही है कि अस्पताल में मरीज अपनी बीमारी से जूझने के पहले यहां अपनी प्यास बुझाने के लिए बूंद बूंद पानी की व्यवस्था में जुटता नजर आ रहा है। अब देखना है कि बूंद बूंद पानी की प्यास से जूझते मरीजों की इस बुनियादी सुविधा के लिए आखिर कौन सा अधिकारी या श्रमिक संगठन का नेता अपनी धृतराष्ट्र जैसी बंद आंख को खोलेगा और अपनी गूंगी जबान को कब संघर्ष की आवाज में बदलेगा।

बूंद बूंद पानी की समस्या का यह है असल कारण.....

समूचे कन्हान कोयलांचल का कन्हान क्षेत्रीय अस्पताल में मरीजों के लिए पेयजल की व्यवस्था हेतु मेल वार्ड के पास एक कूलिंग मशीन लगी हुई थी, जिसे कोरोना काल में बनाए गए आपातकालीन कक्ष में शिफ्ट कर दिया गया था, तो वहीं दूसरी ओर ओपीडी के पास लगी हुई कूलिंग मशीन बीते 15 दिनों से दम तोड़ चुकी है। अस्पताल की इस दम तोड़ चुकी शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के कारण मरीज का दम कब प्यास के चलते टूट जाए, इसका अनुमान अब तक धृतराष्ट्ररूपी अधिकारी और श्रमिक संगठन के नेता और इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण नहीं लगा पाए हैं, जो कि खासा दुखद है। ऐसे नकारे अधिकारी, चिकित्सक और श्रमिक नेताओं की इस घोर लापरवाही के चलते यहां कोई बड़ी घटना के घटित हो जाने पर एक नया बवाल हो सकता है। वेकोली प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल ही विशुद्ध पेयजल की व्यवस्था मरीजों के लिए बना देवें।