- बाजार से सस्ती मूंग खरीदकर सरकारी खरीद केंद्रों पर महंगी बेचकर 13 लाख रुपए से ज्यादा अवैध लाभ लिया। इस फर्जीवाड़ा पर रायसेन जिले की कृषक सेवा सहकारी समिति देवरीकलां, भारकच्छ और गूगलवाड़ा के कर्मचारी रंजीत ठाकुर, गौरव ठाकुर और श्रीराम ठाकुर सहित अन्य के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, ने रायसेन जिले की सहकारी समितियों में मूंग उपार्जन के फर्जी पंजीयन के मामले में दिनांक 08.09.2026 को आरोपी रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर एवं गौरव ठाकुर (सभी निवासी तहसील बरेली, जिला रायसेन) व अन्य के विरुद्ध सरकारी समर्थन मूल्य का बेजा फायदा उठाने के लिए किसानों के नाम पर फर्जी पंजीयन कराने और बाजार से सस्ती मूंग खरीदकर उसे सरकार को महंगे दाम पर बेचने का आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाया जाने से भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(3), 340(2) एवं 61(2) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया है।
तहसील बाड़ी, जिला रायसेन निवासी एक शिकायतकर्ता की शिकायत जाँच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि जिला सहकारी बैंक रायसेन की बाड़ी शाखा के अंतर्गत आने वाली कृषक सेवा सहकारी समिति देहरीकला, भारकच्छ कला और गूगलवाड़ा में दिनांक 01.07.2024 से 26.06.2025 के बीच, वर्ष 2024-25 और 2025-26 के मूंग उपार्जन के दौरान, समिति देहरीकला के कम्प्यूटर आॅपरेटर श्रीराम ठाकुर व कर्मचारी रंजीत ठाकुर और समिति भारकच्छ कला के कम्प्यूटर आॅपरेटर गौरव ठाकुर ने फर्जी पंजीयन के जरिये लगभग 13.35 लाख रुपये का अनुचित लाभ कमाया और शासन को उतनी ही राशि की हानि पहुँचाई।
किसानों के पंजीयन नही कराने पर खुद को सिकमीदार दर्ज किया
जाँच में पाया गया कि समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने के लिए किसान को समिति में अपनी जमीन का पंजीयन कराना होता है। कौन से किसान पंजीयन नहीं कराते, यह जानकारी उपार्जन केंद्र पर बैठे आॅपरेटर के पास रहती है। आरोपियों ने ऐसे ही किसानों की जमीन अपने या अपने परिचितों के नाम पर पंजीकृत कर ली। पंजीयन पर्ची के कॉलम-5 में, जहाँ जमीन मालिक या कौलीदार का नाम आना चाहिए, उन्होंने खुद को सिकमीदार दर्ज कर लिया। ऐसा कोई कौलीनामा किसानों ने कभी दिया ही नहीं था।
किसानों के बजाय बरेली मंडी से घटिया मूंग खरीदी की
जाँच में यह भी पाया गया कि इन फर्जी पंजीयनों पर तौली गई मूंग किसानों के खेत की उपज नहीं थी। आरोपियों ने बाजार, व्यापारियों और बरेली मंडी से घटिया किस्म की मूंग 3,000 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम दाम में खरीदी। उन वर्षों में मंडी में मूंग 1,500 से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी थी। यही मूंग उन्होंने उपार्जन केंद्र पर समर्थन मूल्य (वर्ष 2024-25 में 8,558 और वर्ष 2025-26 में 8,682 रुपये प्रति क्विंटल) पर सरकार को बेच दी।
जिन किसानों के नाम पर मूंग बेची गई, उनको भनक तक नहीं
जाँच में पाया गया कि जिन किसानों के नाम और जमीन का इस्तेमाल हुआ, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी। एक किसान की खसरा क्रमांक 160/3 की लगभग डेढ़ एकड़ जमीन किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत कर उस पर मूंग बेच दी गई, जबकि उस किसान ने अपने बाकी खसरों का पंजीयन खुद कराया था और इस खसरे का नहीं। एक अन्य किसान की पत्नी और बहू के नाम दर्ज लगभग ढाई एकड़ जमीन के कई अलग-अलग पंजीयन अलग-अलग लोगों के नाम पर करा दिए गए। एक और किसान की पत्नी के नाम की खसरा क्रमांक 107 की लगभग पौने दो एकड़ जमीन का भी इसी तरह फर्जी पंजीयन हुआ। इन पंजीयनों में जो बैंक खाते दर्ज थे, वे भी इन किसानों के नहीं थे। किसानों ने अपने कथन में साफ कहा कि उन्होंने न कोई सहमति दी, न कौलीनामा, और न ही उन्हें इस पंजीयन से एक पैसा मिला।
फर्जी पंजीयन करके लाखों की मूंग बेचते रहे
जाँच में पाया गया कि आरोपी श्रीराम ठाकुर ने पंजीयन क्रमांक 222300038017 और 222300037365 के जरिये अपने ही नाम पर 8.095 और 4.532 हेक्टेयर जमीन दर्ज कराई। इन पर उसने 151.524 क्विंटल मूंग बेची और शासन से 13,15,531 रुपये लिए, जबकि यह मूंग उसने लगभग 4,54,572 रुपये में खरीदी थी। यानी लगभग 8,60,959 रुपये का लाभ। रंजीत ठाकुर ने पंजीयन क्रमांक 222300064627 पर 3.523 हेक्टेयर जमीन दर्ज कर 42.276 क्विंटल मूंग बेची, 3,67,040 रुपये लिए और लगभग 2,40,212 रुपये कमाए। गौरव ठाकुर ने समिति भारकच्छ कला में पंजीयन क्रमांक 222300085194 पर 3.428 हेक्टेयर जमीन दर्ज कर 41.136 क्विंटल मूंग बेची, 3,57,142 रुपये लिए और लगभग 2,33,734 रुपये का लाभ लिया। तीनों को मिलाकर लगभग 13,34,905 रुपये का अनुचित लाभ हुआ और शासन को इतनी ही हानि।
अग्रिम साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी
जांच में पाए गए तथ्यों के आधार पर थाना आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल में 08.09.2026 को अपराध क्रमांक 95/2026 पर आरोपी रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर, गौरव ठाकुर एवं अन्य के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(3), 340(2) एवं 61(2) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया है। विवेचना जारी है। प्राप्त अग्रिम साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-अरुण मिश्रा, एसपी, ईओडब्ल्यू, भोपाल