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महिला अफसरों के अपमान के विरोध में नहीं खुले टीएडीपी के ताले, अधिकारियों ने की संचालक नेहा मारव्या के तत्काल तबादले की मांग

  •  TADP में हड़ताल, अन्य 5 कार्यालयों में पेनडाउन, आन्दोलन उग्र होने की स्थिति में जिलों तक फैलने की आशंका
  • अधिकारियों से अभद्रता एवं मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली आहार अनुदान योजना में व्यवधान करने का आरोप
  • रामलाल रौतेल, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी IAS नेहा मारव्या को हटाने की मांग की 

भोपाल ।   कम्यूटर साइन्स  और इन्जीनियरिंग में बीटेक शिक्षित और 2011 बैच की आईएएस अधिकारी और जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना (TADP- Tribal Area Development Pllaning) की संचालक IAS नेहा मारव्या के खिलाफ शुक्रवार को अधिकारी-कर्मचारी सड़क पर उतर आए और नारेबाजी की। 


नेहा मारव्या पर बदसलूकी, इंक्रीमेंट की फाइल रोकने, बार-बार नोटिस देने और सस्पेंड करने की धमकी देने का आरोप लगाया। नेहा मारव्या के इस व्यवहार के विरोध में एक तरफ जहां TADP कार्यालय में 99 प्रतिशत हड़ताल रही। वहीं कार्यालय आयुक्त, अनुसूचित जाति विकास, संचालनालय जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था, कार्यालय आयुक्त–जनजातीय कार्य के अलावा अनुसूचित जाति आयोग और अनुसूचित जनजाति आयेाग के अधिकारियों ने विरोध स्वरूप पेन डाउन कर काम बंद रखा। पेन डाउन में 100 से अधिक अधिकारी शामिल हुए। आन्दोलन तेज होने की‍ स्थिति में यह जिलों तक फैलने की उम्मीद की जा रही है। 

IAS नेहा मराव्या TADP के अलावा TRI, आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम और MAPCET की भी MD हैं। आरोप है कि इन सभी संस्थाओं के 100 से अधिक अधिकारियों का जुलाई 2026 में लगने वाला इंक्रीमेंट नहीं लगाया गया है।

प्राप्त जानकारी अनुसार गुरुवार को अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें दूसरे विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में वर्ष 2017 से संचालित आहार अनुदान योजना से संबंधित जानकारी मांगी गई और मुख्यालय के अधिकारियेां के साथ जिलों के अधिकारियों तक पर आरोप लगाते हुए 2 अपर संचालक महिला अधिकारियों को डांटकर मीटिंग रूम से बाहर भगा दिया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि पीए आलोक अग्रवाल और भृत्य प्रमोद वर्मा को छोड़कर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से लगातार अभद्रता और अमानवीय व्यवहार किया जाता है। 

आंदोलन में शामिल अधिकारियों ने आरोप लगाया कि आहार अनुदान योजना के तहत बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय की करीब 2.40 लाख महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए दिए जाते हैं। नेहा मारव्या के अनर्गल व्यवधान के कारण अगस्त 2026 की करीब 30 करोड़ रुपए राशि अब तक इस वर्ग की महिला‍ओं के खातों में नहीं पहुंची है।

अधिकारियों का यह भी आरोप है कि प्रमुख सचिव गुलशन बामरा जिन अधिकारियों और कर्मचारियों से सीधे बात करते हैं या फोन पर बात करते हैं, नेहा मारव्या ऐसे अधिकारियों कर्मचारियों से नाराज रहती हैं। नेहा मारव्या  ने आदिभवन का एक गेट भी बंद कर दिया है, जिससे कर्मचारियों और अधिकारियों को सीढि़यों से घूमकर आना पड़ता है।                                                                                                                                                                 


विरोध कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों ने कहा कि संचालक टीएडीपी नेहा मारव्या लगातार अभद्र बर्ताव करती हैं। बेवजह के आरोप लगाकर प्रताड़ित किया जाता है। इसी के चलते बीते गुरुवावर को मीटिंग के दौरान दो महिला एडीशनल डायरेक्टर के साथ भी असहनीय और आशालीन शब्दों का इस्तेमाल किए जाने पर मामला गर्मा गया। दोनो महिला अधिकारी शिवानी गुप्ता और रीता सिंह ने इसके बारे में अन्य अधिकारियों को बताया। इसके बाद शुक्रवार को हड़ताल हो गंई और टीएडीपी में सामूहिक अवकाश के चलते ताले तक नहीं खुले।

नेहा मारव्या के तत्काल तबादले की मांग

आंदोलन कर रहे अधिकारियों ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में खुलासा किया है कि संचालक नेहा मारव्या एक दिन में 50 साल पुराना रिकार्ड मांगती हैं। इसी तरह अधिकार के बाहर जाकर अधिकारियों को नोटिस दे रही हैं। मीटिंग के दौरान ही चिल्लाने और अभद्रता करने लगती हैं। इससे अधिकारियों का काम करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में नेहा मारव्या का तत्काल तबादला किया जाए, ताकि अधिकारी और कर्मचारी काम कर सकें।                                        इस आन्दोलन में अधिकारियों के आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग अधिकारी संघ के प्रान्ताध्यक्ष संजय वार्ष्णेय, सचिव अरूण निगम के अलावा शिवानी गुप्ता, रीता सिंह, सीमा सोनी, ऊषा अजय सिंह, सुधीर जैन, राजेश गुबरेले, कुलदीप सिंह ओड, रजनी तुमराम, किशोरी करन्दीकर, अश्वनी चौबे सहित सैकड़ों अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।



अधीनस्थ स्टाफ को निलंबन की धमकी और बदसलूकी के खिलाफ हड़ताल

लगातार संचालक द्वारा अधीनस्थ स्टाफ के साथ मीटिंग के दौरान या सामान्य क्रम में बेहद अशोभनीय और अभद्र बर्ताव किया जा रहा है। महिला अधिकारियों को खुलेआम धमकाया गया और बदसलूकी की गई। इसके विरोध में टीएडीपी में सभी ने सामूहिक अवकाश लिया तो वहीं बाकी तीनों मुख्यालय में पेनडाउन स्ट्राइक रही। हमने मुख्य सचिव को सूचना दी है, जिस पर सोमवार को बुलाया गया है।

-संजय वार्ष्णेय,
अध्यक्ष, आदिमजाति अनुसूचित जाति एवं पिछड़ावर्ग कल्याण विभाग राजपत्रित अधिकारी संघ