Type Here to Get Search Results !

400 करोड़ से ज्यादा की कैलारस शकर कारखाना की जमीन को सिर्फ 61 करोड़ में दे दिया सरकार ने

  • कैलारस गन्ना शुगर फैक्ट्री मुरैना मामले में मध्य प्रदेश सरकार पर भारतीय किसान संघ ने लगाया वादाखिलाफी का आरोप, भारतीय किसान संघ ने दी बड़े आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
​भोपाल। भारतीय किसान संघ मध्य भारत प्रांत ने कैलारस गन्ना शुगर फैक्ट्री (मुरैना) को लेकर मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने राज्य सरकार पर किसानों के साथ विश्वासघात और वादाखिलाफी करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष केसाई रेड्डी का कहना है कि सरकार के निर्णय के खिलाफ किसान संघ आंदोलन करेगा और हमारा नारा होगा हमारी संपत्ति हमको दीजिए।
           

​भारतीय किसान संघ मध्य भारत प्रांत के प्रांत अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष के. साइ रेड्डी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। आरोप है कि मुख्यमंत्री ने मौखिक आश्वासन दिया था कि शक्कर कारखाना कैलारस की भूमि को एमएसएमई (MSME) को देने का निर्णय रद्द किया जाएगा और कारखाने को सहकारिता में पुनर्जीवित करने के लिए समिति गठित की जाएगी। तब सीएम ने आश्वासन दिया था कि शुगर मिल को चलाने के लिए किसान संघ जैसा कहेगा, सरकार वैसा करने को तैयार है। शक्कर कारखाना चलाने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा जिसमें कलेक्टर मुरैना को शामिल रखेंगे, वह कमेटी चीनी मिल को चलाने की संभावनों पर विचार करेगी।

 मुख्यमंत्री के साथ इस चर्चा के बाद भारतीय किसान संघ आश्वस्त था कि सरकार जल्द ही इस संबंध में सकारात्मक आदेश जारी करेगी। आदेश जारी कराने के लिए दोबारा ध्यानाकर्षण किया गया लेकिन 22 अगस्त को सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग विभाग ने एक आदेश जारी कर निजी उद्योगपतियों को फैक्टरी चलाने के लिए आमंत्रित करने की निविदा जारी कर दी गई। एमएसएमई का उक्त आदेश, सीएम द्वारा भारतीय किसान संघ को दिए गए आश्वासन के साथ धोखा है। 

भारतीय किसान संघ मध्य भारत प्रांत ने उठाए बड़े प्रश्न

​किसान संघ ने भूमि के अवमूल्यन का आरोप लगाते हुए कहा है कि कारखाने की निजी भूमि का मूल्य ₹438.4 करोड़ है, जिसे केवल ₹61 करोड़ में MSME विभाग को दे दिया गया। जबकि नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री ने NCDC से ₹5,000 करोड़ की सहायता प्राप्त कर ग्वालियर-चंबल संभाग में 20 से अधिक कारखाने लगाने का प्रस्ताव दिया था। जिस प्रस्ताव का उल्लंघन किया जा रहा है, यह समझ से परे है। ​इसके बावजूद MSME विभाग ने 21 अगस्त 2026 को निजी उद्यमियों से 12 हेक्टेयर भूमि में शक्कर कारखाना चलाने हेतु रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) विज्ञप्ति जारी की और शेष भूमि पर औद्योगिक भूखंड विकसित करने की सूचना दी।

भारतीय किसान संघ मध्य भारत प्रांत ने दी ​आंदोलन की चेतावनी

​किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार एमएसएमई (MSME) के इस आदेश को तत्काल निरस्त नहीं करती है, तो संगठन केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगा तथा किसान हित में न्यायालयीन कार्रवाई के लिए बाध्य होगा।

शक्कर कारखाना की जमीन सहकारिता को लौटाए सरकार, वर्ना किसान आंदोलन

मुरैना जिले के कैलारस स्थित सहकारी शक्कर कारखाना की जमीन को राज्य शासन ने सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग विभाग से सहकारिता को वापस नहीं किया तो भारतीय किसान संघ बड़ा अांदोलन शुरू करेगा। आंदोलन पर सात सितंबर को हरदा की बैठक में चर्चा होगी। सरकार ने शुक्रवार को एमएसएमई विभाग से ईओआई टेंडर जारी कर फैक्टरी के शेयर होल्डर किसानों से धोखा किया। मुख्यमंत्री को किसानहित व क्षेत्र िविकास की दशा में एमएसएमई का आदेश वापस कराना चाहिए ।

भारतीय किसान संघ मध्यभारत प्रांत के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने शनिवार को कहा कि एमएसएमई को जमीन देने की बजाय मुख्य सचिव को अपने स्तर से निर्णय लेकर सहकारी एक्ट की धारा 69-4 में शक्कर कारखाना को चलाने के लिए उसकी संपत्ति शेयर होल्डर किसानों की कमेटी बनाकर उनको सौंप देना चाहिए थी लेकिन ऐसा न करके 439 करोड़ रुपए की संपत्ति को सरकार ने 60.92 करोड़ रुपए में एमएसएमई को सौंप दिया।  
                             
 प्रांत के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान का कहना है कि नेशनल शुगर फैडरेशन ने अपनी जांच रिपोर्ट में राज्य सरकार को सुझाव दिया था कि कैलारस शक्कर कारखाना की संपत्ति को 439 करोड़ रुपए बेचकर उतनी राशि से केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय से 5000 करोड़ रुपए का लोन लेकर चंबल व ग्वालियर संभाग में 20 नए चीनी मिल लगाए जा सकते थे लेकिन सरकार ने उस रिपोर्ट की अनदेखी करने के साथ भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय नेतृत्व को दिए आश्वासन से अपना कदम पीछे हटाया है।     
                                                                                             
 उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ, एमएसएमई के आदेश से असहमत है। इसलिए सात सितंबर को हरदा में आयोजित संघ की बैठक में सरकार के नए निर्णय का विरोध किया जाएगा और शक्कर कारखाना की जमीन एमएसएमई से सहकारिता विभाग को वापस दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू करने पर विचार किया जाएगा।