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मध्य प्रदेश में प्री-मानसून की बौछारें पड़ते ही रेत महंगी, 10 दिन बाद बंद हो जाएंगी खदानें

मध्य प्रदेश के 47 जिलों में रेत का भंडार है, इनमें 17 जिलों से रेत निकाली जा रही है

भोपाल। मध्य प्रदेश में प्री-मानसून की बौछारें पड़ते ही रेत महंगी हो गई है। 10 दिनों में ही रेत के दाम तीन सौ रुपये प्रति सौ घन फीट (एक ट्राली) तक बढ़ गए हैं। जबकि पिछले 20 दिनों की बात करें तो एक ट्राली रेत पर नौ सौ से 1100 रुपये तक की वृद्धि हुई है। यानी भोपाल में अब सौ घन फीट रेत पांच हजार से 5700 रुपये (शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में) बिक रही है। दस दिनों बाद खदानें बंद हो जाएंगी। इसके बाद दाम और बढ़ेंगे। क्योंकि ठेकेदार भंडारित रेत निकालना शुरू करेंगे। इसमें ढुलाई का खर्च दो गुना जोड़ा जाएगा।

रेत के दाम बढ़ने से भवनों की निर्माण लागत पर भी असर पड़ेगा। 20 दिन पहले 650 घन फीट रेत का ट्रक 28 से 29 हजार रुपये में भोपाल पहुंच रहा था, जो शुक्रवार को 38 हजार में पहुंचा है। कुछ स्थानों पर एक ट्रक रेत 40 हजार रुपये तक में पड़ रही है और फुटकर में पांच हजार से 5700 रुपये की ट्राली (सौ घन फीट) रेत बेची जा रही है। ग्राहक इसमें भी ठगा जा रहा है। क्योंकि सौ घन फीट बताकर दी जा रही रेत वास्तव में 70 से 80 घन फीट ही होती है। इससे भवनों की निर्माण लागत बढ़ गई है।

मध्य प्रदेश में हर माह 55 करोड़ 80 लाख फीट (दो करोड़ घन मीटर) रेत की जरूरत पड़ती है। अकेले भोपाल की बात करें तो शहर में रोज 130 से 150 ट्रक रेत लाई जाती है। इसमें से सबसे अधिक रेत नर्मदापुरम (होशंगाबाद) की खदानों के समूह से आती है पर इन खदानों से करीब छह माह से रेत नहीं निकल रही है। दरअसल, समय से रायल्टी राशि न देने के कारण खनिज विभाग ने समूह का ठेका निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ ठेकेदार कोर्ट गया है और तब से खदानों से रेत निकालने पर रोक लगी है।

जिला स्तर पर नीलाम होंगी खदानें

मध्य प्रदेश के 47 जिलों में रेत का भंडार है। इनमें से वर्तमान में 17 जिलों से रेत निकाली जा रही है। करीब नौ जिलों में रेत खदानें नीलाम होना है। जिन्हें अब जिला स्तर पर नीलाम किया जाएगा। वहीं अगले साल सरकार नई रेत नीति लाएगी। जिसमें रेत उत्खनन की पूरा काम जिलों को सौंपा जा सकता है।