शक्तिकांत दास ने कारोबार जगत को अल्पकाल में पुरस्कार की इच्छा की संस्कृति से बचने की सलाह दी
मुम्बई। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री शक्तिकांत दास ने कहा है कि भारतीय कारोबारी जगत की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि वह महामारी के बाद के कार्य में नई वास्तविकताओं के अनुकूल अपने को ढालने में कितनी जल्दी समर्थ होता है।
“भारतीय कारोबार : अतीत, वर्तमान और भविष्य” पर मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में श्री दास ने आज मुम्बई में कहा, “कारोबार करना जोखिम लेना है। लेकिन जोखिम लेने से पहले उसके फायदे और नुकसानों पर सावधानीपूर्वक विचार करना होगा।”
केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव आइकनिक वीक समारोह के अंग के रूप में राष्ट्र निर्माण पर आयोजित सार्वजनिक व्याख्यान की श्रृंखला में यह पहला व्याख्यान था।
अल्पकाल में पुरस्कार की इच्छा की संस्कृति से परहेज करें
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कारोबार जगत को आक्रामक रूप से अल्प काल में पुरस्कार की इच्छा की संस्कृति से परहेज करना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि सभी लाभ और हानि का सोच-विचार कर आकलन करने के बाद कारोबारी मॉडल का चुनाव किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “अनुपयुक्त फंडिंग संरचना, परिसंपत्ति देयता का उपयुक्त मिलान न होना, अवास्तविक रणनीतिक धारणाएं और जोखिम कारकों की उपेक्षा के साथ कारोबार पर विचार पर अत्यधिक केन्द्रित करना कुछ सामान्य विशेषताएं हैं जो कि अनुपयुक्त कारोबारी मॉडल में पाई गई हैं।
इस सिलसिले में श्री दास ने यह भी कहा कि सही कॉर्पोरेट सुशासन में कारोबारी इकाइयों में विश्वास और जवाबदेही के वातावरण के निर्माण के लिए जोर दिया गया है। “सुशासन का लक्ष्य विश्वास निर्माण और उपयुक्त जोखिम संस्कृति तथा नैतिक आचरण को विकसित करना है।”
श्री दास ने कहा, “1991 के सुधारों से भारतीय कारोबार जगत आमूल बदलाव लाने वाले विभिन्न परिवर्तनों का गवाह रहा है, कई सेक्टर में हमारे उद्योग जगत ने वैश्विक प्रतिष्ठा निर्मित की है, विविध चुनौतियों के सामने हमने लचीलापन, नवाचार और अनुकूलता प्रदर्शित की है।”
स्टार्ट अप के संबंध में उल्लेख करते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा, आर्टिफिश्यल इंटेलीजेंस जैसी टेक्नोलॉजी युवा उद्यमियों के लिए नये अवसर प्रदान कर रही है और परिणामस्वरूप तेजी से बड़ी संख्या में यूनिकॉर्न कायम हो रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि युवा उद्यमियों और स्टार्ट अप को लम्बे समय तक बने रहने के लिए निरंतर जोखिमों का परीक्षण करते रहना चाहिए।
हाल के वर्षों में नीतिगत सुधार और भारतीय कारोबार
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई नीतिगत सुधार हुए हैं जिन्होंने कारोबार जगत के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण किया है। श्री दास ने कहा कि अधिक जीएसटी संग्रहण प्रशासनिक और प्रक्रियागत रूप से की गई सुचारू व्यवस्था को बताता है और जीएसटी प्रणाली की अंतर्निहित ताकत को प्रदर्शित करना है जो कि उसके चक्रीय प्रभाव को कम करता है और कारोबारी मुनाफे को बढ़ाता है जिससे कि कारोबारी जगत और केन्द्र तथा राज्यों दोनों सरकारों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा, “जीएसटी ने कई देशों में स्थिरता में लम्बा समय लिया। हम जब जीएसटी के पांच साल पूरे करने वाले हैं, यह ऐतिहासिक अवसर है, कुशल और प्रभावी व्यवस्था बनाने में हमारा अनुभव कई अन्य देशों से बहुत बेहतर रहा है।”
राजस्व सचिव तरुण बजाज ने कहा, कर राजस्व में अच्छी वृद्धि की उम्मीद
राजस्व सचिव तरुण बजाज ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, “आरबीआई और सरकार दोनों ने कुछ कदम उठाए हैं और मुझे उम्मीद है कि इन प्रयासों के नतीजे मिलेंगे और अपने मैक्रो आर्थिक सूचकांकों में हमें आने वाले समय में स्थिरता देखने को मिलेगी।” श्री बजाज ने कहा कि भारत ने 11% का कर, जीडीपी का अनुपात हासिल किया है। राजस्व सचिव ने कहा कि कराधार में बहुत बेहतर लचीलापन मौजूद है, “मैं आशावादी महसूस कर रहा हूं और इस साल बजट बनाते समय हमने जितना आरंभ में सोचा था उससे फिर से हम बहुत अच्छा