परिवार का आरोप-बिना सर्जरी किए ही 8 लाख रुपए का बिल थमाया
भोपाल। राज्य मंत्रालय की संसदीय शाखा के वरिष्ठ कर्मचारी महा सिंह मरावी की इलाज के दौरान मौत होने के बाद परिवार और मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के साथ ही आदिवासियों ने जमकर हंगामा करते हुए सिद्धांता अस्पताल के गेट पर धरना दे दिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने 5 लाख रुपए का बिल लिए बिना ही डेड बॉडी सौंप दी, जिसके बाद ही हंगामा शांत हो सका।इस बारे में प्रदर्शनकारियों की अगुवाई कर रहे मंत्रालय कर्मचारी संघ के संरक्षक सुधीर नायक और कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार पटेल के साथ मृतक महासिंह मरावी के परिजनों ने बताया कि अचानक तबियत खराब होने पर महासिंह मरावी को 2 जुलाई की रात को सिद्धांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब 50 हजार रुपए जमा करवा लिए गए। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज के सामने ही कहा कि, इनकी तो किडनी और लीवर खराब हो गया है। यूरिन भी ब्लॉक हो गई है, ऐसे में सर्जरी करना होगी। इसके बाद मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया, लेकिन सर्जरी नहीं की गई। बावजूद परिवार से ढाई लाख रुपए और जमा करवा लिए गए। इस तरह 3 लाख रुपए परिवार ने जमा करवा दिए थे। परिवार का आरोप है कि तबियत सही नहीं होने पर दूरसे अस्पताल रैफर करने का कहा गया, लेकिन डॉक्टरों ने मना कर दिया। इसके बाद अचानक ही गुरुवार रात तबितय और ज्यादा बिगड़ने से महासिंह की मौत हो गई, लेकिन इसकी जानकारी शुक्रवार सुबह देते हुए 5 लाख रुपए का बिल और थमा दिया गया। बिना बिल चुकाए डेड बॉडी देने से मना कर दिया। तब तक आदिवासी समाज के लोग इकट्ठा हो चुके थे, वहीं मंत्रालय कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि भी पहुंच गए। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया और नारेबाजी करते हुए अस्पताल गेट पर ही धरना शुरू हो गया। तब तक पुलिस और प्रशासन की टीम भी पहुंच गई। इसके बाद दोनों पक्षों में बातचीत के बाद डेड बॉडी बिना बिल भुगतान हुए ही सौंप दी गई।
बिना सर्जरी थमाया बिल
मृतक की परिजन चंदा सिंह मरावी ने आरोप लगाया कि बिना सर्जरी किए सिर्फ आईसीयू में रखने के बदले 5 लाख रुपए का बिल दिया गया है। इससे पहले मुख्यमंत्री अनुदान के लिए केस बनाने का कहा गया था तो डॉक्टरों ने कहा था कि आचार संहिता चल रही है, ऐसे में सीएम हेल्प नहीं मिलेगी। दूसरे अस्पताल भी रैफर नहीं किया।


