भोपाल में तीन दिवसीय सीआईआईएस-2022 सायबर क्राइम इंवेस्टिगेशन एंड इंटेलिजेंस समिट का शुभारंभ
भोपाल। हम अब तेल युद्ध या सैन्य युद्ध के युग में नहीं जी रहे हैं, बल्कि डिजीटल वारफेयर के दौर में हैं। इस युद्ध को तब तक नहीं रोका जा सकता, जब तक कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस खतरे को लेकर सर्वसहमति नहीं होती। इसके लिए पुलिस, ज्यूडिशियरी और लेजस्लेटिव को मिलकर काम करना होगा, जिसके लिए एवीडेंट एक्ट में सुधार के साथ ही पुलिस महकमे में कांस्टेबल से लेकर हायर लेवल तक ट्रेनिंग होना जरूरी है।
यह कहना है राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के डायरेक्टर जस्टिस अमरेश्वर प्रताप सिंह शाही का, जोकि प्रशासन अकादमी में शुरू हुई तीन दिवसीय सायबर क्राइम एंड इंवेस्टिगेशन समिट 'सीआईआईएस-2022' के शुभारंभ सत्र को बतौर मुख्यअतिथी संबोधित कर रहे थे। जस्टिस सिंह ने कहा कि साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सायबर क्राइम के मामलों का निराकरण कठिन होने से आवश्यक है कि सुधार हो। इसके लिए पुलिस विभाग के साथ सुप्रीम कोर्ट के वकील और पूर्व जजों की टीम बनाकर विचार किया जाना चाहिए। अब सिर्फ राज्यों के बीच ही नही, बल्कि देशों के बीच भी सायबर क्राइम रोकने के लिए प्रभावी सहमति जरुरी हो गई है। जस्टिस सिंह ने एक मौजूदा परिदृश्य पर कृष्ण बिहारी नूर का यह शेर भी पढ़ा-
‘जिंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं
इतने हिस्सों में बंट गया हूँ मैं, मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं
जिंदगी मौत तेरी मंजिल है, दूसरा कोई रास्ता ही नहीं
जिसके कारण फ़ साद होते हैं, उसका कोई अता-पता ही नहीं’
इस मौके पर डीजीपी सुधीर सक्सेना ने कहा कि सीआईआईएस-2022 भारत और विदेशों के प्रख्यात सायबर अपराध तथा सायबर कानून विशेषज्ञों, इंटरपोल, न्यायपालिका, विधायिका, कायर्पालिका, उद्योग, सामाजिक संगठनों और शिक्षाविदों जैसे अंतर्राष्ट्रीय कानून संस्थानों के डोमेन विशेषज्ञों को गहन विचार-विमर्श तथा गंभीर चर्चाओं के लिए एक साथ ला रहा है। उन्होंने कहा कि देश में सायबर अपराध खतरनाक दर से बढ़ रहे हैं। इस वर्ष जून 2022 तक 6 लाख 74 हजार से अधिक सायबर सुरक्षा अटैक दर्ज किए गए हैं अर्थात 3700 सायबर अटैक प्रतिदिन। सायबर अपराधों में पिछले 6 वर्षों में 430 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी है। कोविड महामारी के समय सायबर अपराधों विशेषकर आॅनलाईन धोखाधड़ी, डेटा दुरूपयोग और रैम्सवेयर अटैक ने भी महामारी का रूप ले लिया था।
यूनिसेफ मध्यप्रदेश चीफ मिस मागर्रेट ग्वाड़ा ने कहा कि हम शिक्षा मंत्रालय से बच्चों को इंटरनेट उपयोग के स्वस्थ्य तरीकों तथा सायबर स्पेस में उचित ढंग से इंटरएक्ट करने का तरीका सिखाए जाने की अपेक्षा करते हैं। इससे पहले अपने स्वागत भाषण में एडीजी सायबर पुलिस योगेश देशमुख ने कहा कि इस बार यह समिट हाईब्रिड मॉड में आयोजित की जा रही है। इस मौके पर डीजी ईओडब्ल्यू अजय कुमार शर्मा, एडीजी पीटीआरआई जी जनार्दन, एडीजी वेलफेयर विजय कटारिया, केटी वाइफे, एडीजी ट्रेनिंग अनुराधा शंकर, एडीजी एससीआरबी चंचल शेखर, पुलिस आयुक्त मकरंद देउस्कर, डीआईजी सायबर निरंजन वायंगणकर आदि थे।
इन्होंने दिया मार्गदर्शन
सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला ने डाटा प्रायवेसी इन इंडिया, इश्यु एंड चेलेन्जेस तथा एडवोकेट सुहान मुखर्जी ने द लीगल इम्प्लीकेशन्स आॅफ डाटा प्रायेवेसी, वायलेसंस, रूल्स एंड रेग्यूलेशन इन इण्डिया एण्ड इट्स फ्यूचर इन क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम पर मार्गदर्शन दिया।


