- वीर भारत न्यास और मैपकास्ट ने आधुनिक रिमोट सेसिंग और जीआईएस से तैयार किया
- अब भूजल एटलस भूजल प्रबंधन और जल गुणवत्ता आकलन होगा अधिक प्रभावी

जलजनित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और निराकरण में मिलेगी सहायता
राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केन्द्र (एनआरएससी)-इसरो, हैदराबाद के तकनीकी मार्गदर्शन में आधुनिक रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस तकनीकों का उपयोग करते हुए विस्तृत भूजल मानचित्र तैयार किए हैं। इन मानचित्रों के संकलन से “अंतर्जली यात्रा” एटलस का निर्माण किया गया है। यह वैज्ञानिक दस्तावेज उन्नत डिजिटल एलिवेशन मॉडल, लीनियामेंट विश्लेषण और लिथोलॉजिकल डेटा के समेकित अध्ययन के आधार पर किया गया है। एटलस में भूजल संभावना मानचित्र एवं भूजल गुणवत्ता मानचित्र शामिल किए गए हैं, जिससे जल प्रबंधन से जुड़े विभागों को वैज्ञानिक एवं डेटा आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। इसके माध्यम से फ्लोराइड, नाइट्रेट, रासायनिक प्रदूषण और भारी धातुओं की उपस्थिति का क्षेत्रवार विश्लेषण भी उपलब्ध कराया गया है। इससे जलजनित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और उनके निराकरण में सहायता मिलेगी।

जल संबंधी नीति निर्माण और योजना क्रियान्वयन में होगा उपयोगी
यह एटलस जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ग्रामीण विकास एवं कृषि सहित जल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न शासकीय एवं अर्द्धशासकीय संस्थानों के लिए नीति निर्माण एवं योजना क्रियान्वयन में उपयोगी सिद्ध होगा। साथ ही जल विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन एवं अनुसंधान के क्षेत्र में कार्यरत वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों के लिए भी महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में उपयोगी होगा।
-श्रीराम तिवारी, न्यासी सचिव, वीर भारत न्यास , मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग
