- रीजनल जेल मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में प्रोजेक्ट 'प्रहरी' के तहत एक राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के साथ जेल विभाग के सहयोग से सप्ताह का क्षमता-निर्माण कार्यक्रम का गरिमामय समापन
भोपाल। महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं डॉ. वरुण कपूर का कहना है कि, जेलों के सुधार कर्मचारियों और कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की जरुरत है, क्योंकि कई लोगों में मानसिक परेशानी की पहचान हो जाती है और उन्हें सही मदद भी मिलती है, लेकिन कुछ में पहचान नहीं हो पाने से जरूरी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में डिप्रेशन के कारण कई समस्याएं बढ़ते हुए घातक हो सकती हैं।
डीजी जेल डॉ.कपूर गुरुवार को रीजनल जेल मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में एक सप्ताह के क्षमता-निर्माण कार्यक्रम 'प्रहरी' के समापन पर प्रतिभागियों और जेल स्टाफ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जेल कर्मचारी हिरासत में मौजूद लोगों के साथ करीबी संपर्क में रहते हैं। ऐसे में ट्रेनिंग के बाद मानसिक परेशानी, आत्महत्या की प्रवृत्ति, नशीले पदार्थों की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याओं के शुरूआती संकेतों को पहचान कर संबल दे सकते हैं।
डीजी जेल डॉ. कपूर ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद सुधार गृहों में मानसिक स्वास्थ्य और मुश्किल हालात से उबरने की क्षमता को मजबूत करना है। इसके लिए कर्मचारियों को परेशानी पहचानने, चेतावनी के संकेतों को समझने, शुरूआती मदद देने, इलाज के लिए रेफर करने, आत्महत्या और खुद को नुकसान पहुँचाने से रोकने, कलंक को कम करने और कैदियों व कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, मजबूत और मानसिक रूप से जागरूक माहौल बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है।
डीजी जेल डॉ.कपूर गुरुवार को रीजनल जेल मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में एक सप्ताह के क्षमता-निर्माण कार्यक्रम 'प्रहरी' के समापन पर प्रतिभागियों और जेल स्टाफ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जेल कर्मचारी हिरासत में मौजूद लोगों के साथ करीबी संपर्क में रहते हैं। ऐसे में ट्रेनिंग के बाद मानसिक परेशानी, आत्महत्या की प्रवृत्ति, नशीले पदार्थों की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याओं के शुरूआती संकेतों को पहचान कर संबल दे सकते हैं।
डीजी जेल डॉ. कपूर ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद सुधार गृहों में मानसिक स्वास्थ्य और मुश्किल हालात से उबरने की क्षमता को मजबूत करना है। इसके लिए कर्मचारियों को परेशानी पहचानने, चेतावनी के संकेतों को समझने, शुरूआती मदद देने, इलाज के लिए रेफर करने, आत्महत्या और खुद को नुकसान पहुँचाने से रोकने, कलंक को कम करने और कैदियों व कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, मजबूत और मानसिक रूप से जागरूक माहौल बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है।
प्रदेशभर के 30 सुधार कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण
यह विशिष्ट प्रशिक्षण राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) के स्कूल आफ बिहेवियरल साइंसेज एंड फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन्स के ग्लोबल करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन स्टडीज द्वारा मध्य प्रदेश जेल मुख्यालय के सहयोग से आयोजित की गई। इसमें प्रदेशभर से चुने गए 30 सुधार कर्मचारियों ने भाग लिया। वहीं आरआरयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) बिमल एन. पटेल, निदेशक डॉ. नूरीन चौधरी, डीआईजी जेल एमआर पटेल, भोपाल जेल अधीक्षक मनेन्द्र सिंह परिहार, प्रशासनिक अधिकारी दिनेश इमले, कैंपस निदेशक डॉ. राकेश सिंह कुंवर, प्रोेजेक्ट डायरेक्टर डॉ. गीतेश कुमार सिंह और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट महिमा गुप्ता ने विषयवार मार्गदर्शन किया।