कानपुर। पुलिस सेवा का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी संवाद और सहायता पहुंचाना है। सांकेतिक भाषा का ज्ञान पुलिस और दिव्यांगजन के बीच संवाद को सहज और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे पुलिस सेवाओं को अधिक सुलभ, समावेशी और संवेदनशील बनाया जा सकेगा। यह बात पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही।
पुलिस आयुक्त कार्यालय स्थित सभागार में कमिश्नरेट कानपुर नगर की ओर से अखिल उत्तर प्रदेश बधिर संस्था (एयूपीएडी) के सहयोग से पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा का व्यावहारिक ज्ञान देकर दिव्यांगजन से प्रभावी तरीके से संवाद करने के लिए सक्षम बनाना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान संस्था के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा के माध्यम से संवाद करने के विभिन्न तौर-तरीकों की जानकारी दी। दिव्यांगजन से बातचीत के दौरान किन संकेतों का प्रयोग किया जाए और उनकी बात को किस तरह समझा जाए, इसके व्यावहारिक पहलुओं का भी प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में भाग लेकर सांकेतिक भाषा के माध्यम से संवाद करने का अभ्यास किया।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने कहा कि पुलिस के पास अपनी समस्या लेकर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से सहायता और सम्मान मिलना चाहिए। सांकेतिक भाषा की जानकारी होने से सुनने और बोलने में असमर्थ लोगों को अपनी समस्या पुलिस तक पहुंचाने में सहूलियत होगी। इससे शिकायतों और जरूरतों को समझने में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में संस्था के प्रतिनिधियों को अधिकारियों की ओर से प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। इस दौरान अपर पुलिस उपायुक्त मुख्यालय एवं महिला अपराध स्नेहा तिवारी समेत कमिश्नरेट के पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।