उन्होंने वेदों एवं शास्त्रों के संदर्भ में बताया कि भगवत्प्राप्ति के लिए कर्म, ज्ञान और भक्ति तीन प्रमुख मार्ग बताए गए हैं। उन्होंने कर्ममार्ग की चर्चा करते हुए कहा कि वेदों में पूजा-पाठ, यज्ञ आदि कर्मकांडों का वर्णन मिलता है, लेकिन इन कर्मों के लिए अत्यंत सूक्ष्म एवं कठिन नियम भी निर्धारित किए गए हैं। देश, काल, विधि, मंत्रोच्चार और अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं में त्रुटि होने पर कर्म का अपेक्षित फल प्राप्त नहीं होता।
उन्होंने कहा कि केवल कर्मकांड करने से भगवत्प्राप्ति नहीं होती। यदि कर्म करने के बाद भगवान के प्रति प्रेम और अनुराग नहीं बढ़ता, तो वह साधना अपने वास्तविक उद्देश्य तक नहीं पहुंचाती। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कर्मयोग का उपदेश देते हुए कर्म करते समय मन को भगवान में लगाने और कर्म के फल में आसक्ति न रखने का मार्ग बताया है। उन्होंने कहा कि कर्म के साथ भगवान का स्मरण जुड़ना आवश्यक है; केवल शारीरिक रूप से कर्म करते रहना कर्मबंधन से मुक्ति का साधन नहीं बनता।
ज्ञानमार्ग की चर्चा करते हुए सुश्री धामेश्वरी देवी ने कहा कि शास्त्रों में ज्ञान के दो स्वरूप बताए गए हैं—शाब्दिक ज्ञान और अनुभूतिपरक ज्ञान। केवल पुस्तकों एवं शास्त्रों को पढ़कर किसी विषय का ज्ञान प्राप्त कर लेना और उसे साधना के माध्यम से अनुभव करना दोनों अलग बातें हैं। उन्होंने कहा कि केवल बौद्धिक ज्ञान से ईश्वर-प्राप्ति नहीं होती। वास्तविक ज्ञान वही है जो साधक के जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन और ईश्वर के प्रति प्रेम उत्पन्न करे।
उन्होंने कहा कि कलियुग में ज्ञानमार्ग का अनुसरण अत्यंत कठिन है, क्योंकि इसके लिए संसार से गहरा वैराग्य और उच्च आध्यात्मिक पात्रता आवश्यक है। केवल अपने ज्ञान के बल पर चलने वाले साधक में अहंकार उत्पन्न होने की संभावना रहती है, जबकि भक्त स्वयं को भगवान के आश्रित मानकर उनकी शरण ग्रहण करता है। उन्होंने कहा कि भगवान की माया से पार पाने के लिए भगवान की शरणागति और साधना आवश्यक है।
सुश्री धामेश्वरी देवी ने भक्ति मार्ग को सरल बताते हुए कहा कि भक्त अपने बल के बजाय भगवान के बल पर आश्रित रहता है। भक्ति में साधक का लक्ष्य केवल मोक्ष प्राप्त करना नहीं, बल्कि भगवान के प्रति प्रेम प्राप्त करना है।आगामी अंतिम प्रवचन में भक्ति मार्ग एवं भगवत्प्राप्ति के विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा।
प्रवचन के अंत में श्री राधा-कृष्ण भगवान की आरती हुई। प्रवचन श्रृंखला का समापन 3 अक्टूबर 2026 को होगा।