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अब खेतों में प्रयोग से सीखेंगे किसान, दो मॉडल फार्म पर दिखेगा उपज और मुनाफे का अंतर

  • एक ही खेत में वैज्ञानिक और पारंपरिक विधि से होगी गेहूं की खेती, फसल तैयार होने पर उत्पादन की होगी तुलना
  • दूसरे मॉडल फार्म में सब्जियों, फूलों जैसी नकदी फसलों से होने वाली आय का होगा व्यावहारिक आकलन
  • खाद गोदामों में नहीं रुकेगी, समितियों तक तत्काल पहुंचेगी; प्रतिदिन होगी निगरानी
  • ओवरप्राइसिंग और टैगिंग की शिकायतों पर होगी कड़ी कार्रवाई, खाद आपूर्ति के लिए बनेगा कंट्रोल रूम
कानपुर नगर।  
किसानों को वैज्ञानिक खेती के वास्तविक लाभ दिखाने और परंपरागत फसलों के मुकाबले अधिक आय देने वाले विकल्पों से परिचित कराने के लिए जनपद में दो मॉडल फार्म स्थापित किए जाएंगे। इनमें किसान स्वयं वैज्ञानिक एवं पारंपरिक खेती से होने वाले उत्पादन तथा नकदी फसलों से मिलने वाले मुनाफे का अंतर देख सकेंगे। बुधवार को विकास भवन सभागार में आयोजित किसान दिवस की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी श्री महेंद्र सिंह तंवर ने संबंधित अधिकारियों को मॉडल फार्म विकसित करने और वर्तमान बुवाई सीजन में खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।



एक ही खेत में वैज्ञानिक और पारंपरिक खेती से उत्पादन की होगी तुलना

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पहले मॉडल फार्म में किसान की कृषि भूमि को दो बराबर हिस्सों में विभाजित कर गेहूं की खेती कराई जाए। एक हिस्से में किसान अपनी पारंपरिक पद्धति से गेहूं उगाएगा, जबकि दूसरे हिस्से में वैज्ञानिक तकनीकों एवं उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रयोग किया जाएगा। फसल तैयार होने पर दोनों हिस्सों की उपज की तुलना की जाएगी। इससे किसान स्वयं देख सकेंगे कि वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से उत्पादन में कितना अंतर आता है। आवश्यकता पड़ने पर वैज्ञानिक पद्धति से खेती का व्यय संबंधित विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।



दूसरे मॉडल फार्म में परखी जाएगी नकदी फसलों से होने वाली कमाई

दूसरे मॉडल फार्म में किसान अपनी आधी भूमि पर पारंपरिक फसल उगाएगा, जबकि शेष हिस्से में मौसमी सब्जियों, फूलों तथा अन्य अधिक आय देने वाली नकदी फसलों का उत्पादन किया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मशरूम उत्पादन, मत्स्य पालन और बत्तख पालन जैसी कृषि आधारित गतिविधियों का भी प्रदर्शन होगा। दोनों पद्धतियों की लागत, उत्पादन और शुद्ध आय की तुलना कर किसान स्वयं जान सकेंगे कि कौन-सा विकल्प अधिक लाभकारी है।

जिलाधिकारी ने कहा कि मॉडल फार्मों को व्यावहारिक प्रदर्शन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जहां किसान नई कृषि तकनीकों के परिणाम प्रत्यक्ष देखकर अपनी भूमि और संसाधनों के अनुरूप लाभकारी पद्धतियां अपना सकें।



खाद की उपलब्धता की प्रतिदिन होगी निगरानी, कंट्रोल रूम बनेगा

जिलाधिकारी ने जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिए कि वर्तमान बुवाई सीजन में जनपद में यूरिया, डीएपी एवं एनपीके सहित प्रमुख उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। जनपद में खाद का बफर स्टॉक अधिकतम 100 मीट्रिक टन रखा जाए। खाद की खेप प्राप्त होते ही उसे सहकारी समितियों तक तत्काल पहुंचाया जाए, जिससे उर्वरक अनावश्यक रूप से गोदामों में जमा न रहे और किसानों को समय से उपलब्ध हो सके। उन्होंने खाद की उपलब्धता, स्टॉक और वितरण की प्रतिदिन निगरानी तथा कम स्टॉक वाली समितियों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।



जिलाधिकारी ने खाद आपूर्ति एवं वितरण संबंधी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाजार में खाद की निरंतर उपलब्धता बनाए रखी जाए, जिससे बुवाई के समय किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

जिलाधिकारी ने निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद की बिक्री (ओवरप्राइसिंग) तथा खाद के साथ अन्य उत्पादों की जबरन बिक्री (टैगिंग) की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए। ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने दी योजनाओं की जानकारी

किसान दिवस में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों एवं वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी। उपनिदेशक कृषि, जिला उद्यान अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी एवं सहायक निदेशक मत्स्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग की योजनाओं, सुविधाओं और किसानों के लिए संचालित कार्यक्रमों की जानकारी दी।

किसान दिवस में बड़ी संख्या में किसानों एवं किसान प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्री अभिनव जे. जैन, उपनिदेशक कृषि डॉ. आर.एस. वर्मा, जिला कृषि अधिकारी श्री अरुणेश सिंह, जिला उद्यान अधिकारी श्री नरेश कुमार उत्तम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कृषि वैज्ञानिक उपस्थित रहे।