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आशीर्वाद झा के निर्देशन में तीन नाटकों का मंचन, स्कूली रंगमंच में नए प्रयोगों ने खींचा ध्यान

  • ‘किंग लियर’ में बालिका ने निभाया राजा का किरदार, पंचतत्त्वों को बनाया जीवंत पात्र; माइम में बिना प्रॉप्स के रची विकास और विज्ञान की दुनिया

भोपाल। दी आर्ट रिवोल्यूशन (The Art Revolution), भोपाल के तत्वावधान में तीन विशिष्ट नाट्य प्रस्तुतियों— किंग लियर, पंचतत्त्व महाभूतम् और माइम — मानव विकास की गाथा का मंचन पॉडार वर्ल्ड स्कूल (PWS), भोपाल के ऑडिटोरियम, गांधीनगर में किया गया। तीनों नाटकों का लेखन एवं निर्देशन आशीर्वाद झा ने किया। प्रस्तुतियों में 9 से 15 वर्ष तक के बच्चों ने विभिन्न किरदारों को निभाते हुए अभिनय, शारीरिक अभिव्यक्ति और सामूहिक मंचीय संरचनाओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।


इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण विश्वप्रसिद्ध नाटक किंग लियर का स्कूली मंच पर प्रस्तुतीकरण रहा। आयोजकों के अनुसार, यह मध्य प्रदेश के किसी अकादमिक स्कूल में इस नाटक के मंचन का पहला प्रयास है। प्रस्तुति की एक विशेष बात यह रही कि राजा किंग लियर की केंद्रीय भूमिका एक बालिका ने निभाई, जिसने पारंपरिक कास्टिंग से अलग एक रंगमंचीय प्रयोग प्रस्तुत किया।

दूसरी प्रस्तुति पंचतत्त्व महाभूतम् में पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश को मंच पर सजीव पात्रों के रूप में उतारा गया। नाटक में सृष्टि की उत्पत्ति, मानव के विकास, प्रकृति के दोहन और मानव तथा प्रकृति के बीच बढ़ते संघर्ष को दर्शाया गया। पंचतत्त्वों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रकृति के संतुलन की अनदेखी अंततः मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए संकट बन सकती है।

तीसरी प्रस्तुति माइम — मानव विकास की गाथा में बच्चों ने बिना किसी प्रॉप्स के केवल शारीरिक गतिविधियों, भाव-भंगिमाओं और सामूहिक संरचनाओं के माध्यम से मानव विकास की यात्रा को साकार किया। आदिमानव से आधुनिक तकनीक तक की यात्रा को दर्शाते हुए बच्चों ने आग, हवा, आकाश, मशीनों और रॉकेट विज्ञान जैसी अवधारणाओं को अपने शरीर के माध्यम से मंच पर रूपायित किया। मूक अभिनय पर आधारित इस प्रस्तुति ने शारीरिक अभिव्यक्ति की संभावनाओं को रेखांकित किया।

तीनों नाटकों के माध्यम से साहित्य, प्रकृति, विज्ञान और मानवीय मूल्यों को रंगमंच से जोड़ने का प्रयास किया गया। यह प्रस्तुति थिएटर इन एजुकेशन अर्थात शिक्षा में रंगमंच की भूमिका को सामने लाने की दिशा में एक सार्थक पहल रही, जिसमें बच्चों ने केवल अभिनय ही नहीं किया, बल्कि कल्पनाशीलता, अनुशासन, सहयोग और रचनात्मक अभिव्यक्ति का भी परिचय दिया।


हाईलाइट्स :-

9 से 15 वर्ष के बच्चों ने निभाए विविध किरदार — अभिनय, शारीरिक अभिव्यक्ति और मंचीय अनुशासन का प्रभावशाली प्रदर्शन।

महिला कलाकार ने निभाया राजा किंग लियर का केंद्रीय किरदार — पारंपरिक कास्टिंग से हटकर एक अनूठा रंगमंचीय प्रयोग।

पंचतत्त्व बने मंच के जीवंत पात्र —
पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश को मानवीय चरित्रों के रूप में प्रस्तुत कर प्रकृति और मानव के संघर्ष को दर्शाया गया।


बिना प्रॉप्स के शरीर से रची विज्ञान और विकास की दुनिया


— माइम में बच्चों ने शारीरिक संरचनाओं और सामूहिक गतिविधियों से आग, हवा, आकाश से लेकर रॉकेट विज्ञान तक की कल्पनाओं को मंच पर साकार किया।

थिएटर इन एजुकेशन की दिशा में सार्थक पहल —
साहित्य, प्रकृति, विज्ञान और मानवीय मूल्यों को नाट्यकला के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुँचाने का प्रयास।