- बोथिया से मोरडोंगरी तक गोदामों की चर्चा, निजी वाहनों से महाराष्ट्र भेजे जाने की शिकायतें; कथित राजनीतिक संरक्षण और विभागीय अनदेखी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर बोथिया ग्राम में राष्ट्रीय राजमार्ग के पास एक ढाबे के समीप स्थित गोदाम तथा मोरडोंगरी क्षेत्र में अस्थायी गोदामों से माल की आवाजाही होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा मोरडोंगरी बायपास, साई टेकड़ी, बंसोड़ कॉलोनी, अमरावती रोड, संतोषी माता वार्ड और तिगांव रोड जैसे क्षेत्रों में गोदामों के इस्तेमाल की भी जांच की मांग उठ रही है। हालांकि, इन स्थानों पर तंबाकू का अवैध भंडारण होने और वहां से तस्करी संचालित होने की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
शहर में बिक्री कम, फिर करोड़ों का माल किसके लिए?
इस कारोबार को लेकर सबसे बड़ा सवाल माल की मात्रा और उसके वास्तविक बाजार का है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि पांढुर्णा के नाम पर बड़ी मात्रा में सुगंधित तंबाकू और गुटखा मंगाया जाता है, जबकि स्थानीय खपत के मुकाबले इसकी आवक अधिक बताई जाती है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि माल किस व्यापारी ने खरीदा, कहां भंडारित किया गया, किसे बेचा गया और उसका अंतिम गंतव्य क्या था।
यदि खरीद-बिक्री के बिल, जीएसटी रिकॉर्ड, ई-वे बिल और परिवहन दस्तावेजों में अंतर मिलता है, तो कर संबंधी अनियमितताओं की जांच की जा सकती है। बिना दस्तावेज माल का परिवहन या कर नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है। फिलहाल कथित टैक्स चोरी की वास्तविक राशि और इसमें शामिल कारोबारियों की जानकारी आधिकारिक जांच के बिना तय नहीं की जा सकती।
रात के अंधेरे में माल की आवाजाही के आरोप
स्थानीय शिकायतों में आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर माल को सामान्य किराना सामग्री की आड़ में ले जाने और बोरियों में पैक कर परिवहन करने की आशंका है। आयशर, पिकअप, स्विफ्ट, किया, जाइलो और बोलेरो जैसे विभिन्न वाहनों के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है। कुछ शिकायतों में यह भी दावा किया गया है कि ग्रामीण मार्गों पर माल की आवाजाही की सूचना देने के लिए युवाओं को लगाया जाता है।
इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित गोदामों की जांच, वाहनों की आवाजाही, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, परिवहन दस्तावेजों और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड का मिलान किया जाना चाहिए। यदि किसी वाहन में प्रतिबंधित उत्पाद या बिना जरूरी दस्तावेजों के माल का परिवहन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
महाराष्ट्र में प्रतिबंध, फिर सीमावर्ती जिलों तक कैसे पहुंच रहा माल?
महाराष्ट्र में गुटखा और तंबाकूयुक्त खाद्य उत्पादों पर लागू प्रतिबंधों के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में होने वाली आपूर्ति की जांच महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश में किसी उत्पाद की बिक्री या उपलब्धता अपने आप उसे महाराष्ट्र ले जाने की अनुमति नहीं देती। संबंधित राज्य के प्रतिबंधों और लागू खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि पांढुर्णा से महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों तक जर्दायुक्त गुटखा या प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद भेजे जा रहे हैं, तो उनकी खेप कहां से निकलती है, किन रास्तों से गुजरती है और किन खरीदारों तक पहुंचती है? इन सवालों के जवाब दस्तावेजी जांच और संबंधित विभागों की संयुक्त कार्रवाई से ही सामने आ सकते हैं।
छोटे कारोबारियों से लेकर राजनीतिक संपर्कों तक चर्चा
कथित कारोबार में कुछ स्थानीय व्यापारियों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के नाम चर्चाओं में होने के दावे किए जा रहे हैं। यह भी आरोप है कि कुछ लोग कम समय में महंगी गाड़ियां खरीदकर इस कारोबार से जुड़े हैं। लेकिन किसी व्यक्ति की संपत्ति, वाहन या राजनीतिक संपर्क मात्र से उसकी संलिप्तता साबित नहीं होती। इसलिए संबंधित व्यक्तियों के लेनदेन, कारोबारी रिकॉर्ड और वास्तविक भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
यदि किसी व्यक्ति द्वारा राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर जांच में बाधा डालने या अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने के प्रमाण मिलते हैं, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए। कार्रवाई किसी के राजनीतिक या कारोबारी रसूख के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर होनी चाहिए।
पहले भी कार्रवाई, फिर दोबारा उठने लगे सवाल
बताया जाता है कि पिछले वर्षों में अवैध गुटखे के कारोबार को लेकर पुलिस, खाद्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों ने कार्रवाई की थी। कुछ मामलों में प्रकरण दर्ज होने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, उन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, कितनी सामग्री जब्त की गई और वर्तमान में प्रकरण किस स्थिति में हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है।
यदि पूर्व में कार्रवाई के बावजूद इसी तरह का कारोबार दोबारा संचालित हो रहा है, तो यह निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करेगा। संबंधित विभागों को पुराने मामलों की समीक्षा कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कार्रवाई के बाद कारोबार बंद हुआ था या केवल कुछ समय के लिए उसकी गतिविधियां कम हुई थीं।
कोटपा ही नहीं, खाद्य सुरक्षा और कर नियमों की भी जांच जरूरी
सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (COTPA) तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन और अन्य निर्धारित पहलुओं को नियंत्रित करता है। वहीं गुटखा और तंबाकूयुक्त खाद्य उत्पादों पर लागू प्रतिबंधों तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए संबंधित नियमों की जांच आवश्यक है। हर मामले में लागू कानूनी प्रावधान उत्पाद के प्रकार, गतिविधि और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होंगे।
इसके साथ ही जीएसटी, ई-वे बिल, स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री के बिल और परिवहन दस्तावेजों की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि कहीं कर चोरी या रिकॉर्ड में हेरफेर तो नहीं किया गया। यदि अवैध भंडारण, प्रतिबंधित उत्पादों की आपूर्ति या कर संबंधी उल्लंघन प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित विभागों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
अब सवाल विभागों से: जांच होगी या शिकायतों का इंतजार?
पांढुर्णा में कथित तंबाकू कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। खाद्य सुरक्षा विभाग, राज्य कर विभाग, पुलिस, परिवहन विभाग और अन्य सक्षम एजेंसियां अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच कर सकती हैं। जरूरत पड़ने पर संयुक्त निरीक्षण और सीमावर्ती मार्गों पर लक्षित जांच भी की जा सकती है।
पांढुर्णा में कथित तंबाकू कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। खाद्य सुरक्षा विभाग, राज्य कर विभाग, पुलिस, परिवहन विभाग और अन्य सक्षम एजेंसियां अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच कर सकती हैं। जरूरत पड़ने पर संयुक्त निरीक्षण और सीमावर्ती मार्गों पर लक्षित जांच भी की जा सकती है।
जांच के प्रमुख बिंदु
- बोथिया और मोरडोंगरी क्षेत्र में बताए जा रहे गोदामों की वास्तविक स्थिति और वहां रखे माल के दस्तावेजों की जांच।
- पांढुर्णा में तंबाकू और गुटखे की आवक, खरीद-बिक्री तथा वास्तविक खपत का रिकॉर्ड से मिलान।
- महाराष्ट्र की ओर जाने वाली खेपों के बिल, ई-वे बिल, वाहन और परिवहन दस्तावेजों की पड़ताल।
- पूर्व में दर्ज प्रकरणों की स्थिति और की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करना।
- यदि किसी कारोबारी, वाहन संचालक या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता प्रमाणित हो, तो बिना दबाव के कानून के अनुसार कार्रवाई करना।
अब देखने वाली बात यह है कि संबंधित विभाग इन शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं या नहीं। यदि आरोप निराधार हैं, तो तथ्य स्पष्ट होने चाहिए; और यदि नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए। आखिर सवाल केवल तंबाकू के कारोबार का नहीं, बल्कि कानून के पालन, निष्पक्ष प्रशासन और सरकारी राजस्व की सुरक्षा का है।
- बोथिया और मोरडोंगरी क्षेत्र में बताए जा रहे गोदामों की वास्तविक स्थिति और वहां रखे माल के दस्तावेजों की जांच।
- पांढुर्णा में तंबाकू और गुटखे की आवक, खरीद-बिक्री तथा वास्तविक खपत का रिकॉर्ड से मिलान।
- महाराष्ट्र की ओर जाने वाली खेपों के बिल, ई-वे बिल, वाहन और परिवहन दस्तावेजों की पड़ताल।
- पूर्व में दर्ज प्रकरणों की स्थिति और की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करना।
- यदि किसी कारोबारी, वाहन संचालक या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता प्रमाणित हो, तो बिना दबाव के कानून के अनुसार कार्रवाई करना।
अब देखने वाली बात यह है कि संबंधित विभाग इन शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं या नहीं। यदि आरोप निराधार हैं, तो तथ्य स्पष्ट होने चाहिए; और यदि नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो कार्रवाई भी दिखाई देनी चाहिए। आखिर सवाल केवल तंबाकू के कारोबार का नहीं, बल्कि कानून के पालन, निष्पक्ष प्रशासन और सरकारी राजस्व की सुरक्षा का है।




