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ईश्वर-तत्त्व के ज्ञान के लिए सद्गुरु की शरण आवश्यक : सुश्री धामेश्वरी देवी

इंदौर। दिव्य शक्ति पीठ, MR-10 रोड, BRTS मंदिर परिसर, इंदौर में चल रही आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला के *पांचवें दिन* जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज की प्रमुख प्रचारिका सुश्री धामेश्वरी देवी ने सद्गुरु और महापुरुष की आवश्यकता एवं पहचान पर प्रकाश डाला। प्रवचन प्रतिदिन शाम 7 से 9 बजे आयोजित हो रहे हैं।


उन्होंने कहा कि ईश्वर-तत्त्व को जानने के लिए केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है। वेदों के अनुसार श्रोत्रिय एवं ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष की शरण ग्रहण कर जिज्ञासु भाव से सेवा और साधना करने पर ही परम तत्त्व का वास्तविक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने रामायण और अन्य शास्त्रीय संदर्भों का उल्लेख करते हुए गुरु की आध्यात्मिक भूमिका को स्पष्ट किया।

सुश्री धामेश्वरी देवी ने कहा कि महापुरुष की पहचान केवल उनके वेश-भूषा, बाहरी रहन-सहन या चमत्कारों से नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महापुरुष का वास्तविक प्रभाव साधक के भीतर दिखाई देता है—उनके दर्शन और सत्संग से स्वाभाविक रूप से ईश्वर में मन लगने लगता है तथा साधना से जुड़े संशय दूर होकर साधक को सही मार्गदर्शन मिलता है।



उन्होंने यह भी कहा कि सच्चा महापुरुष सांसारिक वस्तुओं या चमत्कारों का प्रदर्शन नहीं करता और न ही कर्म के सिद्धांत के विपरीत कोई आश्वासन देता है। महापुरुष की शरणागति का वास्तविक लाभ साधक के आध्यात्मिक जीवन में परिवर्तन के रूप में दिखाई देता है।

प्रवचन के अंत में श्री राधा-कृष्ण भगवान की आरती हुई। आगामी प्रवचनों में भगवत्कृपा प्राप्त करने के तीन मार्गों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। श्रृंखला 3 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 से 9 बजे जारी रहेगी।