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"माँ, काश मैंने तुम्हारी बात मानी होती तो आज जेल में न होता"

भोपाल । आज दिनांक 16.10.2026 को मध्य प्रदेश जेल एवं सुधारात्‍मक सेवाएं एवं राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के संयुक्त तत्वावधान में विशेष मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम 'अंतर्ध्वनि' केन्‍द्रीय जेल भोपाल में आयोजित किया गया।


नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान केंद्रीय जेल भोपाल के 'सभा भवन' में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की श्रृंखला के तहत 'अंतर्ध्वनि' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बंदियों ने माँ के प्रति व्यक्त किया पश्चाताप।

यह कार्यक्रम महानिदेशक (जेल एवं सुधारात्‍मक सेवाएं) डॉ. वरुण कपूर (IPS) के मार्गदर्शन तथा वरिष्ठ जेल अधीक्षक श्री मानेंद्र सिंह परिहार की देखरेख में आयोजित हुआ। सत्र का सफल संचालन राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट श्री ओम तिवारी ने किया।

सत्र के दौरान आयोजित "प्रियजन के नाम पत्र" गतिविधि में बंदियों ने अपनी माँ को याद करते हुए भावुक चिट्ठियाँ लिखीं। इनमें सबसे मार्मिक संदेश था— "माँ, काश मैंने तुम्हारी बात मानी होती तो आज जेल में न होता।" बंदियों के इस पश्चाताप ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया।

फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट ओम तिवारी ने कहा कि बंदियों का यह पश्चाताप ही उनके सुधार व पुनर्वास की पहली सीढ़ी है। सत्र का समापन एक सामूहिक गहरी सांस और सुखद भविष्य की कामना के साथ हुआ।

कार्यक्रम में कराई गई प्रमुख गतिविधियां:


• सांसों का अभ्यास : 5-4-3-2-1 तकनीक और बॉक्स-ब्रीदिंग द्वारा बंदियों को तनावमुक्त किया गया।

• तनाव पर चर्चा : जेल के तनाव, नींद न आने और घबराहट जैसे लक्षणों को सामान्य बताते हुए तनाव प्रबंधन के उपाय समझाए गए।

• "मन का मौसम" : बंदियों ने बिना नाम लिखे गुप्त रूप से चित्रों और शब्दों द्वारा अपने मन के मौसम (तूफान, उदासी या उम्मीद) को कागज़ पर उकेरा।

• स्क्रीनिंग व फीलिंग्स बॉक्स: सुरक्षा व गोपनीयता के साथ पर्चियों की जांच कर उन्हें बॉक्स में एकत्र किया गया।

• आवाज़ें सुनना : चुनिंदा गुमनाम पर्चियों को पढ़कर बंदियों को अहसास कराया गया कि वे अपने मानसिक संघर्ष में अकेले नहीं हैं।

• खुद से एक वादा : प्रत्येक बंदी ने तनाव महसूस होने पर खुद को शांत रखने का एक सकारात्मक तरीका चुनकर खुद से वादा किया।