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कर्म ही व्यक्ति की संचित निधि है : प्रपन्नाचार्यजी

निशा राठौर, झाबुआ.

आरती उतारते आयोजन समिति अध्यक्ष आरएल राठौर
आरती उतारते आयोजन समिति अध्यक्ष आरएल राठौर
मानव जीवन में जो कर्म एकत्रित होगें वहीं उसकी संचित निधि होगी. कर्मो को घिसकर देखें कि कहीं वह पीतल तो नही है, कर्म ऐसे करो कि स्वर्ण के समान प्राप्ति हो. यज्ञ में मुख्य यजमान द्वारा घी की आहुति लक्ष्मी को समर्पित होती है. यज्ञ शाला में विद्वान पंडितो के निर्देशों का पालन होना चाहिए. भगवान शनि की कथा जीवन को नया आयाम देने की कथा है. शनि का जन्म दृष्टि में दोष व क्रोध के कारण हुआ. शनि की मां छाया का सूर्य के साथ विवाह होना, यम का जन्म लेना व शनि का कौएं पर सवारी करना आध्यात्मिक रूप से कई मायने रखता है. शनि हमेशा एक नेत्र से देखते है जिसे हम सम दृष्टि कहते है. कौआ भी एक दृष्टि से देखता है, जो उनका वाहन है. सूर्य और छाया के सहयोग से यम का जन्म हुआ और शिव ने उसे कालग्रंथ प्रदान किया. शिव के काल दंड को यम को दिया गया जो मृत्यु के स्वामी है.

शनि कथा का श्रवण करते भक्तगण
शनि कथा का श्रवण करते भक्तगण
यह प्रवचन स्थानीय शनि मंदिर में शनि कथा के दूसरे दिन व्यासपीठ से स्वामी प्रपन्नाचार्यजी ने सुनाए. उन्होने कहा कि अंग्रेजी का शब्द जीओडी गॉड में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का एकाकार रूप है. जनरेटर अर्थात् जन्म दाता ब्रह्मा है, आॅपरेटर अर्थात पालन पोषण व संचालन करने वाले भगवान विष्णु है और डिस्ट्रायर अर्थात विनाश दंड देने वाले भगवान शिव है. शिव शक्तियों के दुरूपयोग पर शक्तियां वापस ले लेते है. कलयुग में स्त्रियों का सम्मान अन्य युगों से काफी कम हो गया है. पुरूष समाज नारी को हीनभावना से अपने अधीन समझता है. पत्नी वही है जो पति के पतन मार्ग को अवरूद्ध कर दे, पत्नी खुद मिट जाती है और पति को बचा लेती है. आज हम सभी कलयुग के दंभ के कारण दु:खी है. स्त्री जाति का सम्मान नही करते, न ही अपनो से बड़ो की आज्ञा का पालन करते है. कलयुग ने लोगों को अहंकार से भर दिया है और यह अहंकार दंभ जाग्रत करता है, जबकि स्त्री खुद में मर्यादित होती है और वह चतुष्गुणा होती है.
स्वामीजी ने कहा कि धर्म शास्त्र ने नारी पूजा को महत्व दिया है और बसंत पंचमी पर आज त्रिवेणी संगम कथा में प्रवाहित है. उन्होनें शनि की कथा का जिक्र करते हुए उन्हें धर्म रक्षक व लोक कल्याण के देवता के रूप में निरूपित किया. कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शनि कथा का लाभ लिया. इसके पूर्व प्रात: मंदिर प्रांगण में नवकुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया जिसमें भक्तों ने आहुतियां दी.