नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने कोर्ट में अर्जी देकर अयोध्या में गैर-विवादित जमीन पर यथास्थिति हटाने की मांग की है। राम मंदिर
के लिए कानून की मांग कर रही वीएचपी का कहना है कि यह वैसे तो पहले ही हो
जाना चाहिए था लेकिन सुबह का भूला अगर शाम को आ जाए तो अच्छा ही है। वीएचपी
के पूर्व नेता और अब अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि सरकार का यह कदम 15 लाख रुपये वाला जुमले जैसा ही है।
वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कोर्ट में दायर केंद्र की
याचिका पर कहा कि पूरा मामला तो तब सुलझेगा जब उस जमीन पर फैसला होगा जिस
पर विवाद है। उसके लिए हमारी कोशिश जारी है और गुरुवार-शुक्रवार को धर्म
संसद में संत मिलकर फैसला करेंगे कि आगे क्या करना है। वीएचपी नेता ने कहा
कि जिस जमीन के लिए सरकार ने याचिका दी है उस जमीन पर 26 साल से स्टे लगा
हुआ है।
उन्होने कहा, '26 साल से अपनी ही जमीन पर बाहर बैठे हैं तो वह तो मिल
जाए। अगर कोर्ट के पास सुनवाई के लिए वक्त ही नहीं है तो कम से कम अपनी
जमीन तो ले लें। लेकिन क्या यह पहले नहीं हो जाना चाहिए था, इस सवाल पर
आलोक कुमार ने कहा कि पहले होता तो और भी अच्छा होता लेकिन लेट भी हुआ तो
अच्छा अच्छा ही रहेगा। उन्होंने कहा कि सुबह का भूला शाम को आ जाए तो अच्छा
है।'
हालांकि पूर्व वीएचपी नेता प्रवीण तोगड़िया को यह सरकार का एक और जुमला
ही लगता है। उन्होंने कहा कि हिंदू उस जमीन को मांग रहा है जहां पर रामलला
विराजमान हैं और सरकार उस जमीन की बात कर रही है जो उससे लगी हुई है। यह
ऐसा है कि हिंदू दूध मांग रहा है और सरकार कागज पर गाय का चित्र बनाकर दे
रही है।
तोगड़िया ने कहा कि अगर सरकार को सच में हिंदुओं की चिंता है तो संसद
में कानून क्यों नहीं ला रही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत के
प्रचार प्रमुख राजीव तुली ने कहा कि हम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते
हैं और कोर्ट को भी इसका संज्ञान लेना चाहिए और जिसकी जमीन है उसे वापस
देनी चाहिए।
