लगातार निर्देश जारी होने के बावजूद प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों के न्यायाधीशों द्वारा समय का पालन नहीं करने को हाईकोर्ट ने आड़े हाथों लिया है। हाईकोर्ट प्रशासन ने सभी जिला न्यायाधीशों को स्मरण पत्र जारी कर सभी जजों से कोर्ट समय का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
चीफ जस्टिस एसके सेठ के आदेशानुसार हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरविंद कुमार शुक्ला ने सभी जजों को निर्धारित समय पर आसंदी पर बैठने के निर्देश दिए। पत्र में स्पष्ट कहा गया कि कोई भी जज निर्धारित समय के पहले अपनी आसंदी नहीं छोड़े। पत्र में कहा गया कि समय पर प्रकरणों की सुनवाई नहीं होने से न्याय दान की प्रक्रिया प्रभावित होती है। जजों को कहा गया कि आदेश का उल्लंघन करने या कर्तव्यपालन में कोताही बरतने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। मध्यप्रदेश सिविल कोर्ट रूल्स 1961 के रूल 1, 2 और 5 का हवाला देते हुए न्यायाधीशों को स्मरण कराया गया कि कोर्ट का वर्किंग समय सुबह 10.30 से शाम 5.30 बजे तक का है। सभी जजों को ठीक 11 बजे अपनी आसंदी पर बैठना और लंच ब्रेक तक कार्य करना अनिवार्य है। लंच या चायकाल का समय केवल 30 मिनट का होगा। इसके बाद जजों को पुन: ढाई बजे से कार्य शुरू करना है और शाम 5 बजे के पहले अपनी आसंदी नहीं छोड़नी है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट प्रशासन को शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि अधीनस्थ अदालतों के कुछ न्यायाधीश कार्य-समय का पालन नहीं करते हैं। हाईकोर्ट प्रशासन ने सभी जिलों के जिला न्यायाधीशों को उनके अधीनस्थ कार्य करने वाले सभी जजों से कार्य-समय का पालन सुनिश्चित कराने कहा गया है।
