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मुस्लिम समाज ने आतंकी हमले की निंदा की, शहर काजी बोले - कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा

इंदौर
 पुलवामा में शहीदों को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है। सोमवार को जिला कोर्ट के वकीलों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही एक दिन का वेतन देने की घोषणा की। इसके साथ ही सोमवार को जिला कोर्ट में वकीलों ने कामकाज भी बंद रखा। वहीं बडवाली चौकी पर शहर काजी के नेतृत्व में मुस्लिम समाज ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन किया। हमले की निंदा करते हुए शहर काजी ने कहा - कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा।
शहरकाजी के नेतत्व में मुस्लिम समाज ने निकाला मार्च।

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के विरोध में शहरभर में मुस्लिम समाज ने अलग-अलग इलाकों में मार्च निकाला और शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसी मौके पर मुस्लिम समाज ने पाकिस्तान के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करते हुए हमले की निंदा की। शहर काजी डॉ. इशरत अली ने कहा कि यह घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। हम भारतीय हैं, दो-तीन दिन गम का इजहार करते हैं। इसके बाद अपनी जिंदगी में उलझ जाते हैं। भारत सरकार इसका कोई मजबूत हल निकाले। कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इंशाल्लाह हमेशा रहेगा। कुछ विदेशी ताकतें हमें बांटना चाहती हैं, जो कभी सफल नहीं होगी। भारत को इन हमलों का माकूल जवाब देना चाहिए। भारतीय सेना बहुत ताकतवर सेना है, पूरी दुनिया को यह पता है। कब तक हमारी सेना अपनी जान देती रहेगी। उनकी हिफाजत की जिम्मेदारी भी भारत सरकार की है। इसलिए भारत सरकार को इसका मुस्तकिल रास्ता निकालना चाहिए। भारत का हर नागरिक सेना के साथ है। ये जो विदेशी ताकते हैं वे चहती हैं कि हम आपस में लड़ें। आतंकवादी का कोई मजहब नहीं होता। हर नागरिक को पहले भारतीय बनना होगा। तब जाकर विदेशी ताकतों को यह एहसास होगा कि भारत में इन सैनिकों के साथ सवा सौ करोड़ और भी सैनिक हैं, जो भारत पर जरा सी आंच आने पर अपनी कुर्बानी दे सकते हैं। 
संत समाज भी आतंकी हमले की कड़ी निंदा कर रहा है। गोराकुंड रामद्वारा के संत अमृतराम महाराज ने राजबाड़ा पर श्रद्धा सुमन सेवा समिति द्वारा शहीदों की आत्मशांति के लिए आयोजित हवन एवं शांति पाठ के दौरान कहा कि पाकिस्तान से ज्यादा खतरा देश में छिपे उन गद्दारों से है, जो भारत का खाते हैं लेकिन कश्मीर में सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी और हमले करते हैं। जब तक ऐसे दोहरे चरित्र के लोगों का सफाया, और उनका हुक्कापानी बंद नहीं होगा, ऐसे हालातों का सामना करना पड़ेगा।