27 जून, 1976। एयर फ्रांस के एक विमान ने तेल अवीव से पैरिस के लिए उड़ान भरी। विमान में 248 यात्री और चालक दल के 12 सदस्य शामिल थे। विमान पहले से निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक एथेंस में थोड़े देर के लिए ठहरा। इसी दौरान चार आतंकी रिवॉल्वर और हैंड ग्रेनेड लेकर विमान में घुस गए। दो आतंकी विल्फ्रेड बोस और ब्रिगिट कुलमन जर्मनी के रिवोल्यूशनरी सेल्स नाम के संगठन के थे और दो आतंकी पॉप्युलेशन फ्रंट फॉर द लिब्रेशन ऑफ फिलिस्तीन के थे। आतंकी जहाज के कॉकपिट में घुस गए और जहाज को अपहरण कर लिया। अपहरणकर्ताओं ने 5 मिलियन डॉलर और अपने पांच अलग-अलग देशों में बंद अपने 53 कैदियों को रिहा करने की मांग की। आतंकियों ने धमकी दी कि अगर उनके कैदियों को रिहा नहीं किया जाएगा तो वे एक-एक करके इजरायली यात्रियों की हत्या कर देंगे। आतंकियों ने जहाज को बेनगाजी, लीबिया ले जाने को कहा। वहां विमान में ईंधन भरा गया। लीबिया में आतंकियों ने ब्रिटेन में जन्मी एक इजरायली नागरिक को जाने दिया। बेनगाजी से वे विमान को युगांडा के एन्तेबे हवाई अड्डे पर ले गए। युगांडा का चुनाव उन्होंने इसलिए किया क्योंकि वहां के राष्ट्रपति ईदी अमीन को आतंकियों से सहानुभूति थी।
अपहरणकर्ता सभी यात्रियों को एन्तेबे एयरपोर्ट की पुरानी टर्मिनल बिल्डिंग में ले गए। इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने इजरायली और गैर इजरायली यात्रियों को अलग किया। गैर इजरायली यात्रियों को छोड़ दिया गया जो पैरिस चले गए। 94 इजरायली यात्रियों और दर्जन भर चालक दल के सदस्य को बंधक बना लिया गया।
जब बंधकों की खबर इजरायल पहुंची तो वहां हंगामा मच गया। बंधकों में इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री इत्जाक राबिन के रिश्तेदार भी थे। बंधकों को छुड़ाने का सरकार पर दबाव पड़ने लगा। लेकिन बचाव मिशन बहुत मुश्किल था। दरअसल एन्तेबे और इजरायल के बीच करीब चार हजार किलोमीटर की दूरी थी। जलमार्ग और कीनिया होकर जमीन के रास्ते युगांडा पहुंचना कुछ ज्यादा मुश्किल था। लेकिन हवाई मार्ग से जाना भी कम चुनौतियों से भरा नहीं था। इसके लिए विमान को मिस्र, सूडान और सऊदी अरब से होकर गुजरना पड़ता। इन देशों से वैसे ही इजरायल की बैर थी। खैर वायु मार्ग से ही बचाव मिशन को अंजाम देने की योजना बनी। प्रधानमंत्री राबिन ने बंधकों को छुड़ाने की मुहिम के लिए मंजूरी दे दी। ऑपरेशन का नाम रखा गया ऑपरेशन एन्तेबे। इसीबीच इजरायल को एक अहम खुफिया सूचना मिली। युगांडा का राष्ट्रपति ईदी अमीन उन दिनों एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने मॉरीशस गए थे। योजना बनी की चार हरक्युलस विमान को मिशन पर भेजा जाएगा। एक विमान में उन गाड़ियों को ले जाया जाएगा जिससे अमीन सफर करते थे ताकि युगांडा के सैनिकों को यह लगे कि ईदी अमीन विदेश से वापस लौटे हैं। हरक्युलस के साथ ही दो बोइंग 707 को भी भेजने का फैसला किया गया। एक बोइंग कमांड पोस्ट और दूसरी बोइंग को फील्ड हॉस्पिटल के तौर पर काम करने के लिए भेजना था। (ईदी अमीन की फाइल फोटो)
इजरायल की जासूसी एजेंसी मोसाद ने एन्तेबे एयरपोर्ट के बारे में सारी खुफिया जानकारी जुटा ली थी। यह भी रोचक बात थी कि एन्तेबे हवाई अड्डे के जिस टर्मिनल में बंधकों को रखा गया था, उसे एक इजरायली कंपनी ने ही बनाया था। उस जैसा एक टर्मिनल रात में ही इजरायल में खड़ा किया गया जहां सैनिकों ने मिशन का अभ्यास किया। उधर इजरायल की सरकार अपहरणकर्ताओं से बात करती रही ताकि उनको उलझाए रखा जाए।




