नई दिल्ली। ऑग्मेंटेड रियलिटी तकनीक की मदद से कमजोर दृष्टि वाले मरीजों को बेगतर विजिबिलिटी मिलेगी। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथर्न कैलिफोर्निया में केक स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के मुताबिक एआर ग्लास की मदद से लो विजन की समस्या से जूझ रहे मरीजों को बेहतर मोबिलिटी और नेविगेशन दिया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा बीमारी से पीड़ित लोगों को रिसर्च में शामिल किया। इस बीमारी में लोगों को कम दृष्टि से पीड़ित होते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक एआर ग्लास की मदद से पीड़ितों को 50 प्रतिशत बेहतर मोबिलिटी और 70 प्रतिशत बेहतर परफॉर्मेंस मिला।
केक स्कूल के प्रोफेसर ऑफ ऑप्थेलमोलॉजिस्ट मार्क हुमायुन का कहना है कि वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही लो-विजन टेक्नोलॉजी में वर्चुअल रियलिटी तक ही सीमित है, जिन्हें न सिर्फ इस्तेमाल करना कठीन है बल्कि इसे समझने के लिए मरीजों को कड़ी ट्रेनिंग से भी गुजरना होता है। इसी समस्या से निपटने के लिए और लोगों को बेहतर असिस्टेंस देने के लिए हमारी टीम ने एआर तकनीक ग्लास का सहारा लिया है, जो मरीज के रेटिना पर आसपास की वस्तुओं को चमकीले रंगों में प्रोजेक्ट करते हैं। इसकी सटीकता जांचने के लिए शोधकर्ताओं ने इसकी टेस्टिंग की जिसमें पाया कि एआर ग्लास इस्तेमाल करने वाले मरीजों 50 प्रतिशत तक वस्तुओं से कम टकराए साथ ही उनकी आंखो की क्षमता 70 प्रतिशत का बढ़ गई।
रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा से पीड़ित व्यक्ति की देखने की क्षमता कमजोर हो जाती है, जिसकी वजह से वह कम रोशनी में चीजों को पहचान नहीं पाता। इसके साथ ही अंधेरे में उसे रास्ता समझने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह एआर सिस्टम 6 फीट तक की दूरी में मौजूद ऑब्जेक्ट को चार तरह के अलग अलग चमकीले रंगों में यूजर के रेटिना पर प्रोजेक्ट करता है। इन रंगों की मदद से यूजर की चीजों को पहचानने की क्षमता बढ़ जाती है।
