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मुशर्रफ ने फांसी की सजा पर सवाल उठाए; कहा- मैं आपसी दुश्मनी का शिकार हुआ, पक्ष रखने का मौका तक नहीं मिला


इस्लामाबाद। फांसी की सजा दिए जाने पर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संदिग्ध बताया। उन्होंने बुधवार को एक वीडियो जारी कर कहा कि मैं आपसी दुश्मनी का शिकार हुआ हूं। निजी दुश्मनी के कारण मुझे सजा सुनाई गई। दरअसल, मुशर्रफ को विशेष अदालत ने मंगलवार को 3 नवंबर 2007 में संविधान को स्थगित कर इमरजेंसी लागू करने के मामले में मौत की सजा सुनाई थी। वे फिलहाल दुबई में हैं। गंभीर रूप से बीमार होने के कारण उनका इलाज चल रहा है।

मुशर्रफ ने कहा- मैंने टेलीविजन पर अपने खिलाफ विशेष अदालत का फैसला सुना। इससे पहले पाकिस्तान में ऐसा कभी नहीं हुआ, जब वादी या उसके वकील को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया हो। मैं इस फैसले को संदिग्ध मानता हूं। सुनवाई में शुरू से अंत तक कानून को नजरअंदाज किया गया।
कमीशन अगर दुबई आकर बयान ले तो मैं तैयार: मुशर्रफ
पूर्व सैन्य प्रशासक ने कहा कि विशेष कमीशन दुबई आकर बयान लेता है तो वे इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने बयान दर्ज करने के लिए अनुरोध भी किया था लेकिन, इसे नहीं माना गया। वे पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था का सम्मान करते हैं। चीफ जस्टिस खोसा की तरह उनका भी मानना है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं।
मुशर्रफ ने खोसा की कार्यशैली पर सवाल उठाया
उन्होंने कहा कि मेरे विचार में चीफ जस्टिस खोसा ने इस मामले में फैसला सुनाने में तेजी दिखाई। ऐसा करके उन्होंने अपना इरादा जाहिर किया है। जिस जज ने मेरे कार्यकाल के दौरान निजी फायदा उठाया, वह कैसे मेरे खिलाफ फैसला दे सकता है। कानूनी सलाह लेने के बाद मैं आगे की योजना तैयार करूंगा। उन्होंने पाकिस्तान की जनता और सैन्य बलों को उनकी सेवाएं याद करने के लिए धन्यवाद दिया।