मुंबई। बुधवार 25 दिसंबर को '3 इडियट्स' को रिलीज हुए दस साल पूरे हो गए हैं। फिल्म में वायरस का रोल निभाने वाले बोमन ईरानी ने एक फोटो शेयर कर फिल्म से जुड़े एक्सपीरियंस शेयर किए हैं। वहीं इसकी मेकिंग से जुड़े यादगार किस्से बता रहे हैं खुद डायरेक्टर राजकुमार हिरानी।
बोमन लिखते हैं- बॉलीवुड की कुछ बेहतरीन प्रतिभाओं के साथ काम करने और सबसे यादगार कहानियों में से एक को जीवंत करने का एक मजेदार और यादगार अनुभव था। मुझे बहुत खुशी है कि मैं इस कहानी का हिस्सा था। आज हम 3 इडियट्स के 10 सालों का जश्न मना रहे हैं।
राजू बताते हैं - जब फिल्म लिखी गई तो तीनों मेन लीड का बतौर किरदार 20 से 21 साल का होना था। हमने कास्टिंग के वक्त तय किया कि नए लोगों के साथ बनाएंगे। कुछ अच्छे भी मिले पर तीनों हीरो के रोल वाले कलाकारों की आपस में कैमिस्ट्री जम नहीं रही थी। हम तीनों हीरो के रोल में छह महीने तक नए लोगों को ढूंढते रहे, फिर आमिर से मुलाकात हुई। उन्होंने सुनते ही कहा, वो करना चाहते हैं। पर हम शंका में थे कि वो यंग कैसे दिखेंगे? हालांकि, आमिर को कॉन्फिडेंस था कि वो कर लेंगे। उस वक्त वो 'गजनी' के जोन में थे तो उनकी बॉडी बनी हुई थी। फिर भी उन्हें यकीन था कि वो रैंचो की बॉडी एक्वॉयर कर लेंगे। वो आ गए बोर्ड पर तो फिर बाकी दो कैरेक्टर्स के लिए भी आमिर की उम्र के आसपास के कलाकार ढूंढने लगे। फिर माधवन और शरमन भी मिले। बाकी क्लासमेट्स भी थोड़े ज्यादा उम्र के ही कास्ट किए। ताकि अंतर न दिखे।
लद्दाख की बर्फबारी में फंसे थे 25 क्रू मेंबर्स, खुद रास्ता ढूंढ वापस लौटे
हम लोग लद्दाख गए थे क्लाइमैक्स शूट करने के लिए। अचानक वहां पर जबरदस्त बर्फबारी हो गई। हम लोग लेह से करीब छह घंटे दूर थे। पूरा दिन हम शूट नहीं कर पाए। सोचा कि अगले दिन करेंगे। जब सुबह उठे तो देखा कि पूरा जो लोकेशन था, मैदान था, तकरीबन एक फुट बर्फ से ढंका हुआ था। वहां पर आईटीबीपी के जवानों का कैंप था। उन्होंने हिदायत दी कि वहां से निकल लें, वरना एक बार बर्फ पड़ गई तो महीनों तक निकल नहीं सकेंगे। हम सारे लोग तंबू डाल के वहां रह रहे थे। वहां ढेर सारा प्रोडक्शन का सामान था। सेलफोन किसी के पास नहीं थे। सैटेलाइट फोन जरूर थे। इमिडिएटली हमने वहां से लोगों को निकाल लिया। कैमरा डिपार्टमेंट के 25 लोग बस रह गए थे क्योंकि उनके पास भारी सामान थे। इस वजह से वे बर्फबारी में अटक गए। अगले दिन सैटेलाइट फोन से उन्होंने हमें फोन किया। कहा कि निकालने के लिए कुछ करिए। हम लोग बड़े परेशान हो गए। आर्मी और एयरफोर्स से मदद मांगी, मगर मौसम ऐसा था कि वे भी कुछ कर पाने की हालत में नहीं थे। जैसे तैसे क्रू मेंबर्स वहां से निकले। रास्ता भी चारों ओर बर्फ से ढंका हुआ था। जो सफर छह घंटे का था। क्रू मेंबर्स ने 17 घंटे में तय किए। उन्हें एक पॉइंट तक आना था, जहां से मेन रोड हाईवे नजर आने लग रहा था, जहां पर हम थे वहां सिर्फ बर्फ की चादर थी। क्रू मेंबर्स को वहां तक आते-आते हालत खराब हो चुकी थी। उनका नर्वस ब्रेकडाउन हो गया था। हम आखिरकर वहां शूट ही नहीं कर पाए। फिर हम कोई और जगह ढूंढने लगे पर सारी यूनिट ने सपोर्ट किया। कहा कि अब शूट तो वहीं होगा। हम फिर एक साल बाद सेम लोकेशन पर क्लाइमैक्स शूट करने पहुंचे तो मौसम बहुत खूबसूरत था। उस दफा हमने मजे से वहां शूट किया।'
