नई दिल्ली। 2012 ने रेसलर तरनतारन की गुरशरण कौर के करियर में सब कुछ बदल दिया। पहले नाडा ने बैन लगाया। फिर शादी हुई। घर में लड़ाई फिर ससुराल की मार। सब झेलने के बाद भी गुरशरण ने हार नहीं मानी। नेशनल और साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड जीत अब एशियन चैम्पियनशिप में 72 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज का दांव लगाया। जिस उम्र में रेसलर संन्यास लेतीं हैं उस 35 की उम्र में गुरशरण ने कमबैक किया है। वो भी बेटी निमरत कौर के सामने मिसाल बनने के लिए। 36 की उम्र में वे ओलिंपिक क्वालिफायर के लिए फाइट करेंगी। मोहनपुरा बिलिंग गांव की गुरशरण पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं।
गुरशरण कहती हैं- मां मेरी हिम्मत हैं और बेटी मेरा हौसला
‘‘मैं हार नहीं मान सकती थी। मेरे पीछे मेरी मां थीं, जो मेरी हिम्मत हैं और दूसरी तरफ मेरी बेटी जिसने मुझे लड़ने की वजह दी। मेरा हौसला बढ़ाया। मैं बेटी के लिए नाकामयाब साबित नहीं होना चाहती। मुझे उसके लिए मिसाल बनना था, ताकि वह जब मेरे बारे में सुने तो मुझ पर गर्व करे। वह साढ़े 3 साल की है और अभी वो मुझे देखकर मैट पर प्रैक्टिस करती है। वो कहती भी है कि मुझे मां की तरह बनना है और गोल्ड लाना है। मां और बेटी ने ही मुझे कमबैक करने के लिए ताकत दी है। 2019-20 मेरे लिए बहुत अच्छा रहा है। मैंने नेशनल चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता, मुझे साउथ एशियन गेम्स में खेलने का मौका मिला। यहां पर गोल्ड जीतने के बाद मैंने एशियन गेम्स में खेला और ब्रॉन्ज जीता। मुझे टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालिफायर ट्रायल में खेलने का मौका मिला। मां ने हमेशा एक बात सिखाई, न तो हार मानें न कमजोर बनें, बस यही मेरे जीवन का आधार है। लड़कियां जब कमजोर समझें तो निश्चय करें कि कभी न हारेंगे व न ही कमजोर महसूस करेंगे।’’
2012 में शादी का फैसला साबित हुआ मुश्किल दांव
2012 में डोप टेस्ट में फेल होने पर नाडा ने 9 महीने का बैन लगाया। परिवार ने शादी का फैसला किया, जो मुश्किल दांव साबित हुआ। पति की मार झेलनी पड़ी। गुरशरण पति से अलग हुई तो परिवार के साथ गांव रहने लगी। उनके पति ने केस अमृतसर में फाइल किया। वे जालंधर में पुलिस एकेडमी में ट्रेनिंग करतीं और अमृतसर सुनवाई के लिए जातीं।
