नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने कहा है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था को इस साल मंदी झेलनी पड़ेगी। क्योंकि, कोरोनावायरस की वजह से बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका है। इससे विकासशील देशों को ज्यादा मुश्किलें होंगी। हालांकि, यूएन ने कहा है कि इससे भारत और चीन पर पर असर न पड़ने की उम्मीद है। यूएन ने इसकी वजह नहीं बताई कि वैश्विक मंदी से भारत और कैसे बचेंगे?
संयुक्त राष्ट्र की ट्रेड रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की दो तिहाई आबादी विकासशील देशों में रहती है। इन देशों को कोरोनावायरस के संकट की वजह से बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इनके लिए 187.50 लाख करोड़ रुपए के रेस्क्यू पैकेज की जरूरत है।
केआर सिक्योरिटीज के एमडी देवेन चौकसे का कहना है कि भारत में लाक डाउन का कदम पहले ही चरण में उठाया गया था जो अमेरिका और अन्य देशों ने नहीं किया। इस कदम से कम्युनिटी फैलाव का जो खतरा था वह टल गया। हालांकि दूसरे राज्यों के माइग्रेंट का मामला अभी भी चिंताजनक है। जो 21 दिनो का लाक डाउन किया गया है वह अगर सफल रहता है तो हम कोरोना को काफी नियंत्रण में ला सकते हैं।
दूसरी बात भारत का पर्यावरण सिस्टम अन्य देशों की तुलना में काफी अच्छा है। तीसरी बात जिन देशों ने बीसीजी वैक्सीन का उपयोग किया है उनका इम्यूनिटी सिस्टम काफी मजबूत है और भारत में तो यह अनिवार्य है। हालांकि चीन और जापान ने भी काफी पहले से यह काम किया है।
केयर रेटिंग के चीफ इकॉनमिस्ट मदन सबन्विस का कहना है कि कोरोना वायरस के समाप्त होने के बाद भारत और चीन मंदी से बाहर निकल जाएंगे। कोरोना मामले में भारत थोड़ा पीछे है लेकिन इसे फैलने से रोकने के कदम दुनिया के दूसरे देशों के आगे हैं। सरकार और आरबीआई ने राहत पैकेज की घोषणा की है। वायरस का असर समाप्त होने के बाद यह अर्थव्यवस्था की मदद करेगा। चीन ने घोषणा की है कि वहां स्थिति सामान्य हो रही है। वहां केवल वुहान में लॉकडाउन है, इस कारण मंदी से निकलने में आसानी होगी।
करेंसी वैल्यू, निर्यात और कमोडिटी की कीमतों में गिरावट
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के बाद दूसरे देशों में कोरोनावायरस के फैलने के बाद से पूंजी के निकलने, करेंसी की वैल्यू गिरने, निर्यात में कमी और कमोडिटी की कीमतों में कमी आ रही है। टूरिस्ट की कमी आने से टूरिज्म और एयरलाइंस सेक्टर पर बुरा असर पड़ा है। वायरस से लड़ने में मोनैटरी, फिस्कल आैर प्रशासनिक क्षमता की कमी के कारण महामारी बढ़ती जा रही है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की तरफ ले जाएगी। इस कारण सस्टेनबल डेवलपमेंट लक्ष्य को प्राप्त करने में मुश्किल आएगी।
जी-20 देश राहत पैकेज 375 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ा सकते हैं
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले दो साल में एक्सपोर्ट करने वाले देशों में विदेशी निवेश 150 लाख करोड़ रुपए से 225 लाख करोड़ रुपए तक घट सकता है। हाल के दिनों में विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों ने बड़े पैकेज घोषित किए हैं। जी-20 के मुताबिक ये देश आने वाले दिनों में इकोनॉमी के लिए सपोर्ट को 375 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ाएंगे।
विकसित देशों के सामने भी असंगठित क्षेत्र के वर्कफोर्स की समस्या
विकसित देश भी असंगठित क्षेत्र के वर्कफोर्स की समस्याओं को सुलझाने में मुश्किल झेल रहे हैं। विकासशील देशों के सामने यह समस्या और भी बड़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विकसित अर्थव्वस्थाएं ने कहा है कि कंपनियों और लोगों को भारी नुकसान से बचाने के लिए जो कुछ भी करना होगा, वे पीछे नहीं हटेंगी। विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने इससे लड़ने के लिए पिछले कुछ समय में भारी-भरकम पैकेज घोषित किए हैं।
गरीबी कम होने की उम्मीद थी, लेकिन कोरोना की वजह से बढ़ेगी
कोरोनावायरस की वजह से वर्ल्ड बैंक ने यह चेतावनी दी है। सोमवार को जारी रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक ने कहा कि पहले अनुमान था कि पूर्वी एशिया और एशिया पैसिफिक में इस साल करीब 3.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ जाएंगे, इनमें से 2.5 करोड़ अकेले चीन के होंगे। लेकिन, अब ऐसा अनुमान है कि आर्थिक हालात और बिगड़ते हैं तो गरीबों की संख्या में 1.1 करोड़ का इजाफा हो जाएगा।
ग्रोथ रेट निगेटिव हो सकती है
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्वी एशिया और एशिया पैसिफिक की जीडीपी ग्रोथ इस साल 2.1% रह सकती है। यह माइनस 0.5% तक भी फिसल सकती है। जबकि पिछले साल तक 5.8% ग्रोथ का अनुमान था।
