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शहर में 4 दिन से सब्जी का इंतजार, उधर खेतों में फसल हो रही खराब


भोपाल। राजधानी में लोग पिछले चार दिन से हरी सब्जी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन न तो वेंडर और न ही नगर निगम की गाड़ी गुरूवार को भी अधिकांश क्षेत्रों में सब्जी लेकर नहीं पहुंच पाई। वहीं अधिकांश सांची पार्लर पर राशन के पैकेट ही नहीं पहुंचे।
पिछले आठ दिन से मंडी न खुलने के कारण जहां एक ओर शहर के लोगों को सब्जी नहीं मिल पा रही है, वहीं दूसरी ओर शहर से सटे जिलों और इलाकों में खेतों में सब्जी की पैदावार करने वाले किसानों के सामने ये संकट खड़ा हो गया है कि यदि जल्द ही प्रशासन ने सब्जी बेचने की अनुमति नहीं दी तो उनकी तीन माह की मेहनत बेकार हो जाएगी। गोभी, भिंडी, लौकी, तोरई, धनियां, मिर्च और बैंगन जैसी सब्जी खेतों में सडऩा शुरू हो गई हैं।

4 किसान, 40-50 वेंडर
सब्जी की किल्लत दूर करने के लिए शहर में आठ जोन बांटे गए है। इसमें अलग-अलग गांव से किसान वेंडर के माध्यम से नगर निगम को सब्जी बेच सकेंगे। राजधानी में सब्जी के लिए किस तरह का माहौल है, इसका नजारा गुरूवार को सीहोर नाका स्थित मंडी के बाहर देखने को मिला। यहां सीहार से चार किसान हरी सब्जी लेकर पहुंचे थे और खरीददार थे 40-50 वेंडर। उन्होंने किसानों की सड़ी गली सारी सब्जी खरीद ली।

हेल्पलाइन नंबर से मदद नहीं
सरकार की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि जरूरी चीजों की सप्लाई को बाधित नहीं होने दी जाएगी। ऐसे में अगर कोई तय कीमत से ज्यादा रुपए वसूलता है तो फिर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, लेकिन इन नंबर्स पर कॉल रिसीव नहीं होते या फिर लंबे समय तक इंगेज बताते हैं। ऐसे में लोग थक-हार कर ज्यादा कीमत पर सामान खरीदने को मजबूर हैं।

सांची पार्लरों पर नहीं पहुंचे राशन के पैकेट
प्रशासन ने लोगों की परेशानी का एक समाधान सांची पार्लर के जरिए तलाशने की कोशिश की है। प्रशासन की ओर से सांची पार्लर पर राशन के पैकेट कुछ तय कीमत पर देने की तैयारी की गई है। इसके लिए 103 सांची पार्लर का चयन किया गया है। लेकिन गुरूवार को अधिकांश पार्लरों पर राशन के पैकेट नहीं पहुंचे।

जिला प्रशासन में समन्वय का अभाव
शहर की जनता को आवश्यक समान पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने कागजी तैयारी तो अच्छी की है, लेकिन समन्वय नहीं होने के कारण उनकी तैयारी धरी की धरी रह गई  है। अगर भोपाल जिला प्रशासन सीहोर, होशंगाबाद, विदिशा, रायसेन जिला प्रशासन के साथ बात करके व्यवस्था बनाता तो सब्जी की किल्लत नहीं होती। या तो किसान खुद सब्जी पहुंचा जाते या फिर जिला प्रशासन अपनी गाडिय़ां भेज कर मंगा लेता।