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लॉकडाउन के चलते शब-ए-बारात पर मुस्लिम परिवारो ने घरो मे की इबादत


भोपाल। मुस्लिम धर्मावलंबियो के रातभर जागकर इबादत करने वाले पवित्र त्यौहार शब-ए-बरात पर लॉकडाउन के चलते इसका ऐहतिमाम घरो पर ही किया गया। इस दोरान लॉकडाउन के चलते शांतिपूर्ण महौल में मुस्लिम परिवारो के पुरुष-औरतो ओर बच्चो ने रात भर अपने घरो मे हि जागकर इबादत की। शब-ए-बारात के मुबारक मोके पर मुस्लिम परिवारो ने दिन के समय अपने घरों में मीठा हलवा, खीर, मिठाई सहित अन्य पकवान बनाये ओर शाम के समय फातेहाख्वानी कर इन पकवानो को गरीबों को तकसीम कर दिया गया। गोरतलब है कि इस रात मुस्लिम लोग अपने परिवार के मरहूम लोगो के लिये खास तौर से कब्रिस्तान जाकर उनके लिये फातेहा पढते है, ओर अपने परिवार के दिवंगत लोगो को सवाब पहुंचाने के लिये बढी संख्या मे गरीबो मे दान करते है। लेकिन इस बार लॉकडाउन होने के कारण कब्रिस्तानो मे लोग फातेहा पढने नही पहुचे ओर अपने घरो से ही फातेहा पढकर मरहूमो को सवाब पहुचाया ओर गरीबो को खाना तकसीम किया। हालांकि इस दोरान कई कब्रिस्तानो के आसपास पुलिस की टीम भी गश्त करती नजर आई। देर रात खबर लिखे जाने तक मिली जानकारी के अनुसार इबादत के दोरान मौजूदा समय मे फैली कोरोना महामारी से सारी इंसानियत कि हिफाजत के लिये हर घर में खास तौर से दुआएं की गई। यह सिलसिला अल सुबह होने वाली फज्र की नमाज तक जारी रहेगा, ओर बढी संख्या मे मुस्लिम अगले दिन यानि शुक्रवार का रोजा भी रखेगे, जिसका खास सवाब है। गोरतलब है कि शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने मुस्लिम समुदाय से अपील की थी कि शब-ए-बरात के दिन घर में रहकर इबादत करें। लॉकडाउन का सभी लोग पालन करें ओर कब्रस्तान न जाएं। मुस्लिम उलेमाओ के अनुसार इस्लामी मत अनुसार शब-ए-बारात फैसलों की रात मानी जाती है। इस रात में रब अपने हर नेक बदे की दुआ को कुबूल करता है, और उसके गुनाहों को माफ करता है। यह भी माना जाता है कि इस रात में फरिश्ते दुनिया के सभी बंदों का साल भर का लेखा-जोखा भी रब के सामने पेश करते हैं, जिस पर रब अपनी कुदरत से फैसले फरमाता है, और बंदों को खुशहाली, तंदरुस्ती और इनाम की रहमतों से नवाजता है।