मिलेट ईयर 2023 तक आय दोगुनी करने का प्रदेश का लक्ष्य।
जबलपुर। आदिवासी क्षेत्रों के उत्थान के लिए केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाएं काफी हद तक कारगर दिख रही हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात में भी आदिवासी व्यंजनों को लेकर चर्चा हुई। इसी सप्ताह प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल भी डिंडौरी आए। आदिवासियों के साथ भोजन किया और उनकी की समस्याएं भी सुनीं।
गौरतलब है कि अब तक बैगा चक में 3 मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह, दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह चौहान आ चुके हैं। ये पहली बार था कि प्रदेश के राज्यपाल ने आदिवासियों के बीच आकर उनके हाल का जाना है। आदिवासियों की फसलों को बेहतर दाम मिले उनके जीवन को नई दिशा दी जाए इसके लिए दर्जन भर से ज्यादा योजनाएं चलाई जा रही हैं। कुल मिलाकर आदिवासी के मुट्ठी भर दानों में पोषण का कितना दम है इसे देश की आजादी के बाद अब बेहतर रूप से देखा और सुना जा रहा है।
2023 रहेगा मिलेट ईयर
वर्ष 2023 को संयुक्त राष्ट्र ने मोटे अनाज (मिलेट) के वर्ष के रूप में घोषित किया है, जिसकी तैयारी स्वरूप मध्यप्रदेश कोदो-कुटकी जैसे पौष्टिक मोटे अनाज का उत्पादन करने वाले स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित कर रहा है। साथ ही प्रदेश में अत्याधिक और कम उत्पादन वाली फसलों के बीच संतुलन बनाते हुए मध्यप्रदेश किस प्रकार एक मॉडल राज्य बने जिसमें निर्यात की अधिक संभावना वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाए।
उत्पादन और तकनीक
जबलपुर संभाग में सभी प्रकार की लघु धान्य फसलों का उत्पादन होता है। लघु धान्य फसलों की खेती खरीफ के मौसम में की जाती है। सांवा, काकुन एवं रागी को मक्का के साथ मिश्रित फसल के रूप में लगाते हैं। रागी को कोदो के साथ भी मिश्रित फसल के रूप में लेते है। गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोदो और कुटकी के रेट 50 से 60 रुपए हैं जिसे अमेजन और अन्य आॅनलाइन माध्यमों से बाजार में 120 से 180 रुपए प्रति किलो तक बेचा जा रहा है।
इन जिलों में पैदावार अधिक
जबलपुर संभाग में ये फसलें अधिकतर डिण्डौरी, मण्डला, सिवनी एवं जबलपुर जिलों में ली जाती है। इसके साथ ही प्रदेश के उमरिया, अनूपपुर और बालाघाट से जुड़े क्षेत्रों में भी पैदावार काफी है।
क्षेत्रफल कम हुआ उत्पादन बढ़ा
वर्ष क्षेत्रफल उत्पादन(किलो प्रति हे.)
2002 03 432 225
2007 08 315 273
2012 13 233 347
इसके बाद कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।
(स्त्रोत कृषि सांख्यिकी विभाग)
नेश्नल पार्क से मार्केटिंग
प्रदेश में इन फसलों से बने व्यंजनों की मार्केटिंग के लिए नेशनल पार्कों को बेहतर विकल्प के रुप में रखा जा रहा है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, कान्हा नेशनल पार्क, बांधवगढ़ नेशनल पार्क के साथ पन्ना नेशनल पार्क में भी देशी और विदेशी पर्यटकों को इन अनाजों के प्रति लगाव पैदा करने के लिए इनसे बने आटे, बिस्किट, रोटी और अन्य व्यजनों को परोसने का क्रम जारी है।
राजनीति और आदिवासी भोजन
अनाज की इन फसलों में राजनीति को स्वाद लगातार बढ़ रहा है। चाहे भाजपा- कांग्रेस हो या अन्य पार्टी सभी की नजर आदिवासी वोट बैंक पर है। लिहाजा मप्र के साथ छत्तीसगढ़ में भी मिलेट मिशन के रुप में 14 से अधिक जिलों में समर्थन मूल्य पा इन अनाजों की खरीदी पर काम हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने कार्यकाल में मिलेट मिशन को गति देने के लिए प्रशासनिक तथा सम्बंधित अधिकारियों की बैठक लेकर प्र्रदेश स्तर पर मिलेट मिशन पर एक प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। इस प्रोजेक्ट में कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा, रागी, समा इत्यादि फसलों को शामिल किया जाए और आॅर्गेनिक खेती की जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को शामिल करते हुए प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया था।
अनोखे हैं फायदे
रक्त साफ- ये ब्लड प्यूरीफायर जैसा काम करता है। जो लोग एनीमिया से ग्रसित होते हैं जिनकी शरीर में खून की कमी होती है उनके लिए भी यह फायदेमंद है।
डायबिटीज पेशेंट- जिन लोगों को डायबिटीज है उनके लिए ये अनाज औषधि है। इससे डायबिटीज को कंट्रोल कर सकते हैं। बाजार में इसके बने कुकीज की डिमांड काफी बढ़ रही है।
अनिद्रा से राहत- अगर आप अनिद्रा से ग्रसित हैं तो आप उन्हें कोदो का सेवन करें। यह अनिद्रा के मरीजों के लिए एक नींद वर्धक औषधि के रूप में काम करता है।
कई रोगों का इलाज- कोदो ब्लड कैंसर, इंटेस्टाइन कैंसर, थाइरोइड, और लीवर के सभी समस्याओं का समाधान भी है।
बच्चों के वरदान- इसे आप 9 महीने के बच्चे को भी दे सकते हैं। इसमें चावल से 12 गुना अधिक कैल्शियम होता है। इसमें काफी अधिक मात्रा में मिनिरल्स भी होते हैं।
हम लगातार बेहतर प्रयास कर रहे हैं
सरकार की आदिवासी फसलों को लेकर योजनाओं पर काम हो रहा है। इन फसलों व इनसे बने उत्पादों की बिक्री पर बेहतर कार्य किया जा रहा है।
डॉ प्रदीप कुमार बिसेन/ कुलपति, जेएनकेविवि