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गैस पीडितो पुनर्वास के 37 साल शासन प्रशासन की आत्मसंतुष्टि

भोपाल।  गैस कांड के 37 सालों में राहत और पुनर्वास शासन प्रशासन की नियत की तरह कमजोर होता जा रहा है | आज भोपाल गैस पीडितो से  जुड़े राहत और पुनर्वास के वही मुद्दे है जो बाकि जनता के है | जहरीली गैस कांड सघर्ष मोर्च ने इस लड़ाई को सड़क से विधानसभा और वल्लभ भवन तक लडा है।

मोर्चे का आकलन है कि शासन और प्रशासन इस मुद्दे को ख़त्म करने की मंशा बना रहे है | लकिन अफ्सोस यह है कि साल दर साल लोकप्रियता खोते इस मसले के परिणामो का प्रतिबिम्ब हमे कमला नेहरु जैसे हादसों में दिखाई देता है जो काफी भयावह है।

मोर्चे के प्रयासों  से भोपाल की जनता को 350 करोड़ का मुआवजा प्राप्त हुआ था | तब से मोर्चा निरंतर प्रशासनिक स्तर पर पुनर्वास की पहल कर रहा है | 2019-20 में मोर्चे द्वारा प्रशासन/शासन को दिए गये सुझाव निम्नलिखित है।

1.जहरीली गैस कांड के 37 साल बाद पुनर्वास कार्यो की धीमी गति 

37 सालो में एवं कोरोना महामारी के बाद काफी सामाजिक आर्थिक बदलाव आए है जिन पर अभी तक कोई शोध नही किया गया है |  मोर्चे ने अपने सुझाव में 2019 और 2020 में (कम से कम 2 लाख गैस पीडितो का ) भोपाल गैस कांड और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर रुझान समझने के लिए एक बड़ा सर्वेक्षण करवाने की बात कही जिससे गैस पीड़ितों से जुड़े अनेक विषयों पर उनकी राय ली जाए एवं इसके आधार आगे की पुनर्वास योजना तैयार हो पाए | जिस पर अभी कोई कार्य नही किया गया है।

2. जहरीला कचरा हटाने के संदर्भ में :-

350 टन जहरीले कचरे को हटाने का आदेश सर्वोच्च न्यायलय ने 2014 में दिया था | प्रमुख सचिव ने मोर्चे को 2019 में विश्वास दिलाते हुए बताया था की भारत सरकार से इस संदर्भ में लगातार चर्चा चल रही है एवं प्रशासन इसे प्राथमिकता पर ले रहा है एवं जल्द से जल्द इसका समाधान किया जाएगा | मोर्चे ने जहरीले कचरे के निपटान को तत्परता से करने एवं इस जगह पर एक मेमोरियल बनाने का पुन: निवेदन किया था और पिछले वर्ष मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान  जी ने जल्द से जल्द में इसके निष्पादन का आश्वासन दिया था | परन्तु इसपर अभी तक कोई  कारवाही नही की गयी है | निष्पादन की प्रक्रिया प्रशासन के अनुसार 180 दिन की है | परन्तु विदेशी चंदे पर चल रहे NGO/कुछ Trust इसका विरोध कर रहे है।

(बता दे, मोर्चे के संयोजक स्व. श्री अलोक प्रताप सिंह जी की याचिका (case no. 2804/2004) पर ही इस कचरे को हटाने के आदेश दिए गये थे।

3. आर्थिक पुनर्वास के संदर्भ में :-

मोर्चे ने इस संदर्भ में कई बाते प्रमुख सचिव के समक्ष रखी थी एवं चर्चा के बाद मोर्चे के सहयोग से परियोजनाए तैयार करने की बात भी प्रमुख सचिव ने कही थी | जिसमे, गैस पीड़ितो का कौशल विकास एवं आजीविक लिए कार्य अथवा भोपाल शहर के बेरोजगारों के लिए रोजगार, स्वरोजगार की योजनाए शामिल थी | 2019 में पदस्थ कमिश्नर नगर निगम ने श्री अनन्य प्रताप सिंह के सुझाव कि सारे सरकारी काम जैसे यूनिफॉर्म, सफाई ,पोषण आहार गैस पीड़ित स्व सहायता समूहो को दिया जाने को दिया जाए माना था और इस पर कार्य करने का आश्वासन दिया था | मोर्चे ने सुझाव दिया था कि गैस पीड़ितो में 17.7% महिला शिल्पी है  इन्हे दूसरे विभाग जैसे हस्तशिल्प विकास निगम, लघु उद्योग ,निगम नगर, निगम पंचायत एवं आजीविका में आने वाले कार्यों को गैस पीड़ित स्वयं सहायता समूह को दिया जाना चाहिए | परन्तु गैस पीड़ित समूहों को इन कार्यो में कोई प्राथमिकता नही दी गई।

4. भारत सरकार द्वारा 2010 में लगाई गई समीक्षा याचिका (curative petition No.345-347/2010) में राज्य सरकार इंटरवीन बनना चाहती है | इस निर्णय का स्वागत करते हुए मोर्चे ने सुझाव 2019 में दिया था कि गैस त्रासदी मुआवजे के केस की शुरुआती पिटिशन जहरीली गैस कांड संघर्ष मोर्चा की थी, अत: वर्तमान में एक सलाहकार समिति बनाई जाए जिसमें श्री विभूति झा जी एवं अन्य समाजसेवी तथा एक्सपर्ट को शामिल किया जाए जिस पर प्रमुख सचिव ने जनवरी 2020 में इस संदर्भ में एक मीटिंग का आश्वासन भी दिया था।

(गैस पीड़ितों को 350 करोड़ का अंतरिम मुआवजा जहरीली गैस कांड संघर्ष मोर्चा की याचिका पर ही मिला था |) परंतु इस पर भी मोर्चे से कोई चर्चा नहीं की गई है।

5. भोपाल में बन रही 3437 cr की स्मार्ट सिटी में गैस पीडितो को आवास एवं व्यवसाय के लिए जगह दी जाये | शहर की किसी भी नई व्यवथा में गैस पीड़ितो एवं आश्रितो का हक होना चाहिए।

मोर्चे के इन सारे सुझावो का में से कई कार्य प्रारंभ किये गये लेकिन योजना के किर्यान्वयन में 2016 से गैस पीड़ित संस्थाओं को सम्मलित नही किया गया फलस्वरूप परियोजना से गैस पीडितो का हक सुनिश्चित  नही हो पाया | हर परियोजना बनाने के लिए कई निजी कंपनियां सलाहकार के रूप में दखल रखती है जिससे योजना का फायदा सही हितग्राही तक नही पहुच पता और गैस पीडितो के पुनर्वास के न हो पाने के पीछे यह बड़ा कारण है।

जहरीली गैस कांड संघर्ष मोर्चा को 7 दिसंबर 1984 को बना था एवं जिसकी याचिका पर भोपाल गैस पीड़ितो को सर्वोच्च न्यालय के फेसले में 350 करोड़ का अंतरिम मुआवजा मिला | यह मोर्चा पिछले 37 साल से निरंतर गैस पीड़ितो के पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहा है | इस मोर्चे ने ही एक बड़ा देश व्यापक जन आंदोलन तैयार किया था जिसके बाद ओधोगिक जिम्मेदारी पर कानून बना, जो आज भी कानून विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है।

      अनन्य प्रताप सिंह 

       कार्यकारी अध्यक्ष