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9 माह बकाया वेतन ना लेने के इनाम में मिला ट्रांसफर

भोपाल। एक अखबार में 10 से अधिक कर्मचारियों को 9 माह से वेतन नहीं लेने के इनाम में ट्रांसफर लेटर मिला है। ट्रांसफर लेटर भी चपरासी के हाथों पहुंचाया गया है। ट्रांसफर लेटर में  केवल ट्रांसफर का उल्लेख करते हुए दो लाइन ही लिखी गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पाउच अखबार में पिछले 9 माह से  कर्मचारियों ने अपने मालिक आदर्णीय भैया का साथ देते हुए वेतन नहीं लिया। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि भैया पुनः मौत की काली कमाई से बरी होकर आएंगे और पुनः अखबार को चांद लगाकर निकालेंगे। लेकिन उनकी धैर्य की परीक्षा का इनाम भैया  ने दे दिया है। 4-5 दिन पहले 10 अधिक कर्मचारियों को ट्रांसफर लेटर थमा दिए  है। इसमें किसी को दिल्ली, तो किसी को मुंबई तो किसी को रायपुर जाने का आदेश दिया गया।   वैसे सूत्र बताते हैं कि कुल 17 लोगों का ट्रांसफर लिस्ट में नाम है। इसमें कुछ लोगों को मेल पर ट्रांसफर लेटर मिलने के बाद उन्होंने अखबार मेंं आना बंद कर दिया है इसमें कई रिपोर्टर भी शामिल हैं।

ट्रांसफर लेटर नहीं मात्र कागज

आज कुछ साथियों ने कानूनविदो की ट्रांसफर लेटर के संबंध में राय ली है। कानूनविदों ने कहा कि इस ट्रांसफर लेटर का कोई औचित्य नहीं है, यह केवल आपको धमकाने, परेशान करने या नौकरी छोड़ने के नई चाल है। इस ट्रांसफर लेटर केवल दो लाइन लिखी गई है, जो कानूनी रूप से अवैध है। इस लेटर को लेकर अखबार प्रबंधन आपको चुनौती नहीं दे सकता। क्योंकि इसमें ना तो वेतन का उल्लेख है  और ना ही ट्रांसफर किए गए संस्थान का स्थान व पता है। ट्रांसफर लेटर भी चपरासी के हाथों भेजे गया है इससे साफ जाहिर होता है कि यह चमकाने की कार्रवाई की गई है।  इस संबंध में कानूनविदों ने कहा है कि आप सबसे पहले तो मजीठिया मामले की शिकायत करें और भविष्यनिधि में बकाया जमा करने के लिए आवेदन करने के साथ 9 माह के वेतन के लिए एक आवेेदन श्रमायुक्त कार्यालय में लगाएं। इससे आपके बकाया वेतन का रास्ता साफ हो जाएगा और कानूनी रूप से आपका पक्ष मजबूत होगा।

जबाव के बाद चुप्पी

इधर सूत्र बताते हैं कि एक पत्रकार का ट्रांसफर कर दिया गया। जब उक्त पत्रकार ने मेल पर जवाब भेजा कि मेरा 9 माह का वेतन दिया जाए, साथ ही मेरा जिस स्थान पर ट्रांसफर किया गया वहां के पता देने के साथ ही, मकान किराया का पैसा, बच्चों के एडमिशन का पैसा व आने-जाने के किराया का पैसा इस 9 माह का बकाया वेतन में से दिया जाए तो भैया की बोलती बंद हो गई। इधर पूरे अखबार में कर्मचारियों में घबराहट का माहौल है। हर कर्मचारी मेल खोल-खोलकर अपने ट्रांसफर लेटकर आने की दहशत में है। लेकिन 9 माह के बकाया वेतन और अवैध ट्रांसफर के संंबंध में कोई आवाज उठाने को तैयार नहीं है।