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पार्थिवेश्वर पूजन से रोगों व भय से मुक्ति के साथ ही देती है मोक्ष: हरिकेश शास्त्री

बेगमगंज। निकटवर्ती ग्राम कल्याणपुर में चल रहा शिवार्चन जिसमे ज्योतिषाचार्य हरिकेश शास्त्री तिंसुआ  वालो ने बताया सावन माह भगवान शिव को  प्रिय है, इसी कारण शिव अराधना के लिए सावन माह सबसे उत्तम और विशेष रूप से फलदाई माना जाता हैं। इस पावन माह में पार्थिव शिवलिंग निर्माण को विशिष्ट माना जाता है, वो इसलिए क्योंकि साधक खुद शिवलिंग का निर्माण करता है और पावन पार्थिव शिवलिंग की पूजा-अर्चना  कर मोक्ष का अधिकारी बनता है। वहीं शास्त्रों के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने से करोड़ों यज्ञों के बराबर फल भी प्राप्त होता है। हिंदू धर्म में सावन माह को भगवान शिव की भक्ति का महीना माना जाता है। शिव पुराण में भी इसका जिक्र है कि भगवान शिव का प्रिय माह सावन है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन माह में भगवान शिव का पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिवत उसकी पूजा-अर्चना करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं सावन माह में भगवान शिव के पार्थिव शिवलिंग की विधिवत आराधना करने के क्या लाभ है और इसकी पूरी विधि..भगवान श्री राम ने भी किया था पार्थिव शिवलिंग का निर्माणभगवान श्री राम नें भी लंका पर विजय पाने व रावण के साथ युद्ध करने से पहले पार्थिव शिवलिंग की पूजा की थी। श्री राम द्वारा इस पूजा को करने के बाद उन्होंने लंका पर विजय प्राप्त की थी। शिवलिंग का विधिवत पूजन करने से जीवन में सुख, संपत्ति और शान्ति रहती है। साथ ही संतान सुख से वंचित दंपत्तियों की गोद भर जाती है और सभी दुखों से छुटकारा मिलता है।भगवान शिव की पार्थिव पूजा का विशेष महत्व माना जाता हैं क्योंकि पंचतत्वों में भगवान शिव पृथ्वी तत्व के अधिपति हैं। पार्थिव शिवलिंग के पूजन को किसी भी नदी, तालाब के किनारे, शिवालय घर अथवा किसी भी पवित्र स्थान पर किया जा सकता है।

शिवार्चन में वर्णित विद्वान ओम प्रकाश जी एवं मुख्य यजमान इंदराज सिंह यादव जी एवं उनके पुत्र सुनील यादव अनिल यादव एवं ग्रामवासी ने भगवान शिव का पूजन अभिषेक आरती में शामिल हुए।