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बॉलीवुड में मुगलों पर फिल्‍म बनती हैं, मगर साइंस और साइंटिस्टों पर नहीं: माधवन

मुंबई। इंडस्‍ट्री में आर माधवन ने एक्टिंग के अलावा ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्‍ट’ से राइटिंग और डायरेक्‍शन में भी कदम रखा है। माधवन इसमें वैज्ञानिक नंबी नारायण की भूमिका निभाई है। इसकी मेकिंग में माधवन ने कई साल दिए हैं। वह इस फिल्म से इमोशनली अटैच्‍ड हैं। उन्‍होंने इसे बनाने की वजहें, तरीकों और बाकी पहलुओं पर दैनिक भास्कर से डिटेल्‍ड बात की है। 

माधवन बताते हैं, ऐसी फिल्‍में और नंबी नारायण जैसों पर फिल्‍म बनाना एक नेशनल ड्यूटी है। हालांकि यह थॉट फिल्‍म बनाने से पहले नहीं आया था। वह इसलिए कि मैं तो इसमें बस एक्‍ट करने वाला था। फिल्‍म को डायरेक्‍ट करने वाले काम पर तो मैं बहुत लेट आया। मैंने नंबी नारायण पर रिसर्च कर जाना कि इनके कहानी दुनिया को पता चलनी ही चाहिए।

लोगों को शायद पता ना हो, मगर नंबी नारायण इंडिया से ज्‍यादा फ्रांस में पॉपुलर हैं। वहां उनके कम्‍युनिकेशन की लैंग्‍वेज इंग्लिश थी। ऐसे में मैं अगर सिर्फ तमिल और इंग्लिश में फिल्‍म बनाता तो वह एक तरह का मैनिपुलेशन होता। लिहाजा हमने इसे तीन लैंग्‍वेज हिंदी, इंग्लिश और तमिल में बनाया।