चंबल-पार्वती की बाढ़ ढह गए थे एक सैकड़ा से अधिक लोगों के घर।
श्याेपुर। चंबल-पार्वती नदी ने ऐसा रूप राेद्र रूप दिखाया कि नदी किनारे बसे कई गांवों में तबाही मच गई। इन नदियों की बाढ़ ने 100 से अधिक परिवारों के सपनों के अाशियाने उजाड़ कर रख दिए। नदी का पानी उतरने के बाद जब लोगों ने गांव में जाकर अपने घर देखे तो घर का नामोनिशान तक नहीं मिला। तबाही के इस मंजर को देख परिवार के लाेगों की आंखों से आंसू झलक आए। अब पीड़ित परिवार बाढ़ से तबाह हुए घरों फिर सवांरने में जुट गए हैं।
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| घरों के संवारते बाढ़ पीड़ित। |
चंबल-पार्वती नदी ने दो दिन तक ऐसा कहर बरपाया कि, 40 करीब गांवाें को अपनी गिरफ्त में ले लिया। इन गांवों में के लोग तीन दिन तक दहशत के साए में जीने को मजबूर रहे। गुरुवार को चंबल और पार्वती नदियाें का जलस्तर उतरने के बाद राहत की सांस ली। किंतु चंबल-पार्वती नदी की बाढ़ अपने पीछे तबाही के निशान छोड़ गई हैं। बाढ़ से हुए नुकसान का वास्तविक आंकलन प्रशासन के सर्वे के बाद सामने आएगा, लेकिन हर ओर बर्बाद घर-गृहस्थी और तबाह फसालों का दर्द साफ नजर आ रहा है। नदी का पानी उतरने के बाद जब पीड़ित अपने घरों की ओर लौटे तो तबाही का मंजर देखकर रुलाई फूट पड़ी। चंबल की जद में आए सारसा गांव में 168 परिवार है, जिसमें 90 परिवारों के घर बाढ़ के साथ बह गए। बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे ग्रामीणों की मदद के लिए समाजसेवी आगे रहे हैं। जहां प्रशासन के राहत कैंप तो चल ही रहे हैं, वहीं अब सामाजिक संस्थाएं और संगठन भी आगे आए हैं और लोगों को सूखा राशन और भोजन बांट रहे हैं। शुक्रवार को जिले के बर्धाबुजुर्ग, बड़ौदा, ज्वालापुर, श्योपुर से लोग पीड़ितों की मदद करने के लिए पहुंच रहे हैं, यहां तक राजस्थान के सामजसेवी भी बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री भज रहे हैें। वहीं कुछ संस्थाएं तो राजस्थान के इटावा, खातौली सहित चंबल किनारे के राजस्थान के गांवों में भी राहत पहुंचाना रहे हैं।
छठवें दिन शुरू हुआ श्योपुर- कोटा हाइवे
पार्वती नदी का जल स्तर कम हाेने के बाद शुक्रवार की रात खातौली से पानी नीचे उतर गया था, लेकिन पुल पर मलवा जमा होने के कारण वाहन नहीं निकल पा रहे थे। शुक्रवार की सुबह पुल मुलवा हटाया गया इसके बाद अावागमन शुरू हो गया। बता दें कि, मलावा क्षेत्र में हुई झमाझम बारिश के कारण बीते रविवार की रात पार्वती नदी का जल स्तर बढ़ गया था, और सोमवार सुबह से श्याेपुर का कोटा से संर्पक कट गया था। तब से हाइवे बंद चल रहा था। पार्वती नदी का पानी उतरने के बाद छठवें दिन शनिवार की सुबह से श्योपुर कोटा हाइवे चालू हुआ है।

