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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: लिटिल बैले ट्रुप के सभागार में फुलवारी 2026 का आयोजन: योग, राग और ताल- झूम उठा भोपाल

  • नटराज कथक कला अकादमी के आयोजन "फुलवारी 2026" में राग और ताल के साथ मंच पर फाल्गुनी रंगों की बौछार उड़ी 
भोपाल। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और संगीत दिवस पर योग मुद्राओं और नृत्य का अनूठा संगम लिटिल बैले ट्रुप के सभागार में साकार हुआ। नटराज कथक कला अकादमी के आयोजन "फुलवारी 2026" में राग और ताल के साथ जब मंच पर फाल्गुनी रंगों की बौछार उड़ी तो मानों पूरा भोपाल झूम उठा‌।



श्यामला हिल्स स्थित लिटिल बैले ट्रुप के सभागार में नटराज कथक कला अकादमी द्वारा आयोजित "फुलवारी - 2026" में उस्ताद अलाउद्दीन ख़ाँ संगीत अकादमी के उपनिदेशक शेखर करहाडकर मुख्य अतिथि थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती रक्षा दुबे सहायक आयुक्त, जी.एस.टी., भोपाल मौजूद थीं। संस्था की अध्यक्ष एवं नृत्य गुरु श्रीमती अपर्णा चतुर्वेदी तथा सचिव पत्रकार संजय चतुर्वेदी ने अतिथियों का शॉल श्रीफल से सम्मान किया।


 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री करहाडकर ने युवा कलाकारों को प्रोत्साहित किया तथा उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। श्रीमती रक्षा दुबे ने कहा कि योग और नृत्य के रूप अलग हैं लेकिन साधना एक जैसी है। उन्होंने कार्यक्रम के स्वरूप की सराहना करते हुए प्रतिभागी कलाकारों को शुभकामनाएं दीं‌।

युवा कवि संदीप द्विवेदी के रचनापाठ ने सुधि श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया

कार्यक्रम का आरंभ दुर्गेश पाण्डेय के भजन गायन से हुआ। इसके बाद युवा कवि संदीप द्विवेदी के रचनापाठ ने सुधि श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। फादर्स डे के अवसर पर उन्होंने पिता का वचन निभाने के लिए राम के त्याग पर प्रभावी कविता का पाठ किया। कार्यक्रम में बाल कलाकार सुबीर चतुर्वेदी ने की बोर्ड पर प्रस्तुति देकर सभी पिता को समर्पित की।



रायगढ़ घराने की बंदिशों को प्रशिक्षु और प्रशिक्षित कलाकारों ने पेश कर दर्शकों को बांधे रखा

फुलवारी में इसके उपरांत कथक नृत्य की प्रस्तुति हुई‌। कुल 1 घंटे 15 मिनट की इस प्रस्तुति में रायगढ़ घराने की बंदिशों को प्रशिक्षु और प्रशिक्षित कलाकारों ने एक साथ मंच पर पेश कर दर्शकों को बांधे रखा।  आरंभ राग यमन में विष्णु वंदना भुजंगशयनम से हुआ जिसमें योग मुद्राओं का प्रदर्शन किया गया। ठुमरी मतवारो बादल, चितचोर सांवरे, नैना नीर भरे पर भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ शुद्ध कथक में तीन ताल की बंदिशों पर गुरू वंदना की प्रस्तुति की गई । इसके माध्यम से गुरु की महिमा का बखान करने के साथ गुरु शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित किया गया। श्रीमती अपर्णा चतुर्वेदी की कविताओं पर भाव नृत्य की प्रस्तुति ने सुधि दर्शकों को मुग्ध कर दिया।


इरा सक्सेना की प्रस्तुति ने मंच पर मथुरा सा उल्लास बिखेर दिया

कार्यक्रम का समापन होली गीत से हुआ। राग तिलक कामोद में निबद्ध होली तन रंग लो ये, मन रंग लो रे में सभी कलाकार एक साथ मंच पर आए। कृष्ण रूप में इरा सक्सेना की प्रस्तुति ने मंच पर मथुरा सा उल्लास बिखेर दिया। दर्शक भी इस प्रस्तुति में फागुनी उमंग के साथ झूम उठे। कथक नृत्यांगना श्वेता शर्मा तथा मोनिका पाण्डेय ने प्रशिक्षु कलाकारों के साथ कदम ताल कर आयोजन को गरिमामय बना दिया। 


कथक नृत्यांगना एवं नृत्य गुरु श्रीमती अपर्णा चतुर्वेदी के साथ मनस्वी, वाणी, श्रेया, ऋचा, रोशनी, श्रद्धा, कनिष्का, प्रशा, आद्या, पर्ल, प्राची, प्रियांगी, विहिका, आरवी, यति, अवनी, गरिमा शुभदा, तक्ष्वी एवं अरात्रिका ने मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया।     
कथक की इस प्रस्तुति में पांच राग यमन, मियां सारंग, तिलक कामोद, देश, गौड़ सारंग और दो तालों एक ताल और तीन ताल में निबद्ध किया गया था। कार्यक्रम में गायन एवं हार्मोनियम पर दुर्गेश पाण्डेय, तबले पर अशेष उपाध्याय, सितार पर अंबरीश गंगराडे, तथा बाँसुरी पर विद्याधर आमटे ने संगत दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ मैत्री चतुर्वेदी ने किया।