- भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल में भारत सॉइल हेल्थ पॉलिसी’ पर परामर्श कार्यशाला आयोजित
इस अवसर पर डॉ. एम. मोहंती (निदेशक, भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान) ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए भारत में ‘भारत सॉइल हेल्थ पॉलिसी’ की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मिट्टी के प्रकार, अलग-अलग तरह के मौसम, आदिवासी खेती, इकोसिस्टम से मिलने वाली सेवाओं और मुख्य फसलों/खेती के तरीकों जैसी विशेषताओं और चुनौतियों के कारण, मध्य और पश्चिमी क्षेत्र के लिए यह परामर्श कार्यशाला खास है; इसलिए, क्षेत्रीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की सेहत से जुड़ी नीति बनाने की ज़रूरत है।

इस कार्यक्रम में, डॉ. ए.के. नायक, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), आईसीएआर, नई दिल्ली ने हमारे देश में 'भारत सॉइल हेल्थ पॉलिसी' शुरू करने की दिशा में दूरदर्शी लोगों की तारीफ़ की। उन्होंने पॉलिसी को लागू करने के लिए बनाए गए मॉनिटरिंग पैरामीटर्स और मैनेजमेंट फ्रेमवर्क की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 'भारत सॉइल हेल्थ पॉलिसी' को लागू करने के लिए पॉलिसी और गाइडलाइंस एक अहम दस्तावेज़ हैं और इनमें किसानों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), इंडस्ट्री, अधिकारियों और वैज्ञानिकों जैसे स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी ज़रूरी है। उन्होंने कई मंत्रालयों द्वारा लागू की जा रही सरकारी योजनाओं के तालमेल की गुंजाइश पर ज़ोर दिया और डिजिटल टूल्स के ज़रिए उन्हें सॉइल हेल्थ पॉलिसी से जोड़ने का आग्रह किया।

इस दो दिवसीय (29 से 30 जून, 2026) विचार-विमर्श में डॉ. ए. के. सिंह (पूर्व कुलपति, आरवीएसकेवीवी, ग्वालियर), डॉ. बी. एस. द्विवेदी (पूर्व सदस्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एएसआरबी, नई दिल्ली), डॉ. ए. के. शुक्ला (कुलपति, आरवीएसकेवीवी, ग्वालियर), डॉ. वी. के. खरचे (कुलपति, एमपीकेवी, राहुरी), डॉ. के. एस. रेड्डी (निदेशक, आईसीएआर-एनआईएएसएम, बारामती) तथा सुश्री प्रवीणा श्रीधर (सेव सॉयल प्रतिनिधि) भारत विशेषकर केंद्रीय व पश्चिमी क्षेत्र के संदर्भ में ‘भारत सॉइल हेल्थ पॉलिसी’ की अवधारणा, रूपरेखा, प्रमुख विशेषताओं एवं विकास पर अपने विचार व्यक्त करेंगे।

इस कार्यक्रम में, डॉ. ए.के. नायक, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), आईसीएआर, नई दिल्ली ने हमारे देश में 'भारत सॉइल हेल्थ पॉलिसी' शुरू करने की दिशा में दूरदर्शी लोगों की तारीफ़ की। उन्होंने पॉलिसी को लागू करने के लिए बनाए गए मॉनिटरिंग पैरामीटर्स और मैनेजमेंट फ्रेमवर्क की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 'भारत सॉइल हेल्थ पॉलिसी' को लागू करने के लिए पॉलिसी और गाइडलाइंस एक अहम दस्तावेज़ हैं और इनमें किसानों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), इंडस्ट्री, अधिकारियों और वैज्ञानिकों जैसे स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी ज़रूरी है। उन्होंने कई मंत्रालयों द्वारा लागू की जा रही सरकारी योजनाओं के तालमेल की गुंजाइश पर ज़ोर दिया और डिजिटल टूल्स के ज़रिए उन्हें सॉइल हेल्थ पॉलिसी से जोड़ने का आग्रह किया।

इस दो दिवसीय (29 से 30 जून, 2026) विचार-विमर्श में डॉ. ए. के. सिंह (पूर्व कुलपति, आरवीएसकेवीवी, ग्वालियर), डॉ. बी. एस. द्विवेदी (पूर्व सदस्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एएसआरबी, नई दिल्ली), डॉ. ए. के. शुक्ला (कुलपति, आरवीएसकेवीवी, ग्वालियर), डॉ. वी. के. खरचे (कुलपति, एमपीकेवी, राहुरी), डॉ. के. एस. रेड्डी (निदेशक, आईसीएआर-एनआईएएसएम, बारामती) तथा सुश्री प्रवीणा श्रीधर (सेव सॉयल प्रतिनिधि) भारत विशेषकर केंद्रीय व पश्चिमी क्षेत्र के संदर्भ में ‘भारत सॉइल हेल्थ पॉलिसी’ की अवधारणा, रूपरेखा, प्रमुख विशेषताओं एवं विकास पर अपने विचार व्यक्त करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. एम. के. गथाला (सिमिट) एवं डॉ. यश शेरावत (आईएफडीसी) ने ‘भारत सॉइल हेल्थ पॉलिसी’ की कार्यसूची, उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
इस कार्यशाला में देशभर से आए प्रख्यात वैज्ञानिकों के साथ-साथ सॉलिडेरिडाड, डॉ. रेड्डीज़ फाउंडेशन, धनुका, कोरोमंडल, आईजेडए, फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी, डब्ल्यूएचएच, सीईईडब्ल्यू, ग्रीन चक्र, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) तथा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र एवं गोवा के प्रगतिशील किसानों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. एस. के. बेहरा (प्रमुख, मृदा रसायन एवं उर्वरता विभाग) एवं डॉ. निशांत सिन्हा (वरिष्ठ वैज्ञानिक) द्वारा किया गया।
इस कार्यशाला में किसानों, वैज्ञानिकों, राज्य कृषि विभाग के अधिकारियों तथा निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित लगभग 200 प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए मध्य एवं पश्चिमी भारत क्षेत्र के लिए ‘भारत मृदा स्वास्थ्य नीति’ के प्रारूप तैयार करने हेतु अपने महत्वपूर्ण सुझाव एवं विचार प्रस्तुत किए।
