पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह राजधानी भोपाल में एक जत्थे के साथ भूख हड़ताल पर बैठे हैं । उन्होंने बताया कि मानसून के आने में देरी होने और इस बार करीब 30% से कम बारिश की आशंका को देखते हुए किसान पहले से ही चिंताओं से घिरे हुए हैं । उस पर खाद की अनुपलब्धता तथा उसके वितरण में अनेक अनावश्यक शर्तें लगाए जाने से मिलने में बाधाएं खड़ी किये जाने से उसकी मुश्किलें और बढ़ गयी हैं । पिछली 10-15 वर्षों से सरकार के कुप्रबंधन और योजना के अभाव के चलते प्रदेश में खाद की किल्लत बनी हुई है । कालाबाजारियों को प्रोत्साहन दिए जाने के चलते कृत्रिम कमी और नकली खाद की स्थिति भी बनी हुई है । नकली बीजों का संकट इसके अलावा है जिसकी उत्तरदायी कंपनियों को केंद्र और प्रदेश की सरकारों ने पूरी छूट दे रखी है ।
माकपा की मांग है रासायनिक खाद पर्याप्त मात्रा में बिना किसी अड़ंगे के उपलब्ध कराया जाए, टोकन प्रणाली खत्म की जाए, प्रामाणिक बीज उपलब्ध कराये जाएँ तथा बीजों के निष्फल जोने पर उसका पूरा मुआवजा दिया जाए ।
मार्क्सावादी कम्युनिस्ट पार्टी के सभी राज्य स्तरीय नेता भी प्रदेश में अलग अलग स्थानों पर भूख हड़ताल में शामिल हैं । इनमे . भोपाल में राज्य सचिव जसविंदर सिंह के साथ सचिव मण्डल सदस्या नीना शर्मा, गाडरवारा में राज्य सचिव मंडल सदस्य बादल सरोज, सबलगढ़ में राज्य सचिव मंडल सदस्य एवं कैलारस नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक तिवारी, सबलगढ़ नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष मुरारीलाल धाकड़, ग्वालियर में राज्य सचिव मंडल सदस्य एवं पूर्व पार्षद रामविलास गोस्वामी, अनूपपुर में पार्टी राज्य सचिव मंडल सदस्य अखिलेश यादव , गोहद में गोहद नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष प्रेमनारायण माहौर, इंदौर में राज्य सचिव मंडल सदस्य कैलाश लिम्बोदिया और अरुण चौहान, रीवा में जिला सचिव अमित सहगौरा., जयसिंहनगर में जिला सचिव बुद्धसेन सिंह गोंड और बाजना में कांतिलाल निनामा आदि प्रमुख हैं ।
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार भोपाल के अलावा मुरैना में कैलारस और सबलगढ़, ग्वालियर में ग्वालियर भूख हड़ताल तथा डबरा भितरवार में प्रदर्शन, भिंड में गोहद में भूख हड़ताल, इंदौर रतलाम: बाजना, नरसिंहपुर में गाडरवारा, रीवा में रीवा, अतरैला, सेमरिया,शहडोल में जयसिंहनगर,अनूपपुर; अनूपपुर तथा सिवनी में भूख हड़ताल शुरू हो चुकी है ।
इंदौर में विधिवत सूचना दिए जाने के बावजूद जिला प्रशासन ने टेंट लगाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया । इसके बाद भी आन्दोलन किया जा रहा है ।