- खेतों में बोनी कर रहे किसानों तक पहुंचकर तैयार कर रहे आबादी भूमि की स्वामित्व रजिस्ट्री,
- हंडिया तहसील के नीमगांव हल्के में पटवारी राजीव जैन की कार्यनिष्ठा बनी मिसाल
हरदा। शासन की योजनाओं को धरातल पर उतारने में मैदानी अमले की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है, इसका उदाहरण इन दिनों आबादी भूमि स्वामित्व योजना के तहत देखने को मिल रहा है। लक्ष्य का दबाव, सर्वर की धीमी गति, तकनीकी परेशानियां और ऑनलाइन पोर्टल की दिक्कतें भी पटवारियों के हौसले को डिगा नहीं पा रही हैं। तमाम चुनौतियों के बावजूद पटवारी दिन-रात मेहनत कर ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि के स्वामित्व की रजिस्ट्री उपलब्ध कराने में जुटे हुए हैं।
मध्यप्रदेश सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना के अंतर्गत गांवों की आबादी भूमि का ड्रोन सर्वे कराकर वहां निवासरत पात्र परिवारों को उनकी भूमि का स्वामित्व अधिकार उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शुरू की गई इस योजना से ग्रामीणों को अपनी आबादी भूमि पर कानूनी स्वामित्व का दस्तावेज मिलने का रास्ता खुला है। प्रारंभिक विरोध और विभिन्न प्रक्रियागत गतिरोधों के बाद अब पटवारी इस कार्य को पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
हालांकि, इस कार्य में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कभी सर्वर काम नहीं करता तो कभी मोबाइल ऐप में तकनीकी समस्या आती है। समग्र पोर्टल और ई-केवाईसी की प्रक्रिया में भी बाधाएं सामने आ रही हैं। कई मामलों में संबंधित खातेदारों की मृत्यु हो चुकी है, तो कुछ किसान गांव में उपलब्ध नहीं मिलते। इसके बावजूद पटवारी दस्तावेजों का मिलान करने, हितग्राहियों से संपर्क करने और उनकी रजिस्ट्री तैयार कराने में लगातार जुटे हैं।
बोनी का समय, दीपावली की तैयारी, फिर भी नहीं थम रहे कदम
वर्तमान में किसान रबी फसलों की बोनी-बखरनी में व्यस्त हैं। खेतों में कृषि कार्य अपने चरम पर है और दीपावली का त्योहार भी नजदीक है। ऐसे समय में ग्रामीणों को अपने घरों पर उपलब्ध कराना भी चुनौतीपूर्ण है। इन परिस्थितियों को समझते हुए पटवारी स्वयं किसानों तक पहुंच रहे हैं। कई पटवारी सुबह लगभग 7 बजे से लेकर रात 10 से 11 बजे तक अपने हल्के में रहकर स्वामित्व रजिस्ट्री से संबंधित काम पूरा कर रहे हैं।
नीमगांव हल्के में राजीव जैन की कार्यशैली बनी उदाहरण
इसी क्रम में हंडिया तहसील के नीमगांव हल्के में पदस्थ पटवारी राजीव जैन भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इस अभियान में जुटे हुए हैं। वे प्रतिदिन देर रात 9 से 10 बजे तक कार्य कर ग्रामीणों की आबादी भूमि की स्वामित्व रजिस्ट्री तैयार करने में लगे हैं। विशेष बात यह है कि जो किसान बोनी-बखरनी के चलते दिनभर खेतों में व्यस्त रहते हैं, उनके पास स्वयं खेतों तक पहुंचकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है।
किसानों के कृषि कार्य में बाधा न आए और शासन की योजना का लाभ भी समय पर मिल सके, इसके लिए राजीव जैन खेतों में पहुंचकर आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि कोई भी पात्र ग्रामीण केवल अपनी व्यस्तता या तकनीकी कारणों से योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।
जवाबदेही और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दे रहा मैदानी अमला
दरअसल, सरकारी योजनाओं की सफलता केवल आदेश जारी करने या लक्ष्य निर्धारित करने से नहीं होती, बल्कि इसके लिए मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण जरूरी होता है। आबादी भूमि स्वामित्व योजना में पटवारियों की मौजूदा कार्यशैली इसका उदाहरण है। तकनीकी परेशानियों और समय के दबाव के बीच भी ग्रामीणों को उनका अधिकार दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पटवारियों की यह मेहनत बताती है कि जिम्मेदारी का निर्वहन केवल कार्यालय में बैठकर नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर खेतों और गांवों तक पहुंचकर भी किया जाता है। निश्चित रूप से ऐसे प्रयास शासन की महत्वपूर्ण योजना को सफल बनाने के साथ ही ग्रामीणों के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना के अंतर्गत गांवों की आबादी भूमि का ड्रोन सर्वे कराकर वहां निवासरत पात्र परिवारों को उनकी भूमि का स्वामित्व अधिकार उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शुरू की गई इस योजना से ग्रामीणों को अपनी आबादी भूमि पर कानूनी स्वामित्व का दस्तावेज मिलने का रास्ता खुला है। प्रारंभिक विरोध और विभिन्न प्रक्रियागत गतिरोधों के बाद अब पटवारी इस कार्य को पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
हालांकि, इस कार्य में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कभी सर्वर काम नहीं करता तो कभी मोबाइल ऐप में तकनीकी समस्या आती है। समग्र पोर्टल और ई-केवाईसी की प्रक्रिया में भी बाधाएं सामने आ रही हैं। कई मामलों में संबंधित खातेदारों की मृत्यु हो चुकी है, तो कुछ किसान गांव में उपलब्ध नहीं मिलते। इसके बावजूद पटवारी दस्तावेजों का मिलान करने, हितग्राहियों से संपर्क करने और उनकी रजिस्ट्री तैयार कराने में लगातार जुटे हैं।
बोनी का समय, दीपावली की तैयारी, फिर भी नहीं थम रहे कदम
वर्तमान में किसान रबी फसलों की बोनी-बखरनी में व्यस्त हैं। खेतों में कृषि कार्य अपने चरम पर है और दीपावली का त्योहार भी नजदीक है। ऐसे समय में ग्रामीणों को अपने घरों पर उपलब्ध कराना भी चुनौतीपूर्ण है। इन परिस्थितियों को समझते हुए पटवारी स्वयं किसानों तक पहुंच रहे हैं। कई पटवारी सुबह लगभग 7 बजे से लेकर रात 10 से 11 बजे तक अपने हल्के में रहकर स्वामित्व रजिस्ट्री से संबंधित काम पूरा कर रहे हैं।
नीमगांव हल्के में राजीव जैन की कार्यशैली बनी उदाहरण
इसी क्रम में हंडिया तहसील के नीमगांव हल्के में पदस्थ पटवारी राजीव जैन भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इस अभियान में जुटे हुए हैं। वे प्रतिदिन देर रात 9 से 10 बजे तक कार्य कर ग्रामीणों की आबादी भूमि की स्वामित्व रजिस्ट्री तैयार करने में लगे हैं। विशेष बात यह है कि जो किसान बोनी-बखरनी के चलते दिनभर खेतों में व्यस्त रहते हैं, उनके पास स्वयं खेतों तक पहुंचकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है।
किसानों के कृषि कार्य में बाधा न आए और शासन की योजना का लाभ भी समय पर मिल सके, इसके लिए राजीव जैन खेतों में पहुंचकर आवश्यक जानकारी एवं दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। उनका प्रयास है कि कोई भी पात्र ग्रामीण केवल अपनी व्यस्तता या तकनीकी कारणों से योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।
जवाबदेही और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दे रहा मैदानी अमला
दरअसल, सरकारी योजनाओं की सफलता केवल आदेश जारी करने या लक्ष्य निर्धारित करने से नहीं होती, बल्कि इसके लिए मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण जरूरी होता है। आबादी भूमि स्वामित्व योजना में पटवारियों की मौजूदा कार्यशैली इसका उदाहरण है। तकनीकी परेशानियों और समय के दबाव के बीच भी ग्रामीणों को उनका अधिकार दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पटवारियों की यह मेहनत बताती है कि जिम्मेदारी का निर्वहन केवल कार्यालय में बैठकर नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर खेतों और गांवों तक पहुंचकर भी किया जाता है। निश्चित रूप से ऐसे प्रयास शासन की महत्वपूर्ण योजना को सफल बनाने के साथ ही ग्रामीणों के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत कर रहे हैं।


