- कवरेज के दौरान मारपीट, अपहरण और वीडियो-फोटो डिलीट करने के आरोप; घायल पत्रकार के भाई का हाथ फ्रैक्चर, मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
बेगमगंज। वरिष्ठ पत्रकार कृष्णा यादव और उनके भाई देवेश यादव के साथ मारपीट, अपहरण और बंधक बनाकर रखने की घटना को लेकर क्षेत्र के पत्रकारों में आक्रोश है। मामले में आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन तहसीलदार प्रमोद उईके को सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया कि 8 अक्टूबर को प्रेस पत्रकार क्लब के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार कृष्णा यादव, निवासी वार्ड क्रमांक 16 बेगमगंज, अपने भाई देवेश यादव के साथ कार से सुल्तानगंज मार्ग होते हुए ग्राम बिछुआ प्रतापगढ़ जा रहे थे। इसी दौरान ग्राम मोदकपुर में एक कथित अवैध क्लीनिक और मेडिकल दुकान का संचालन होते देखकर उन्होंने चलती कार से उसका वीडियो कवरेज किया और आगे निकल गए।
पत्रकारों के अनुसार, कुछ माह पहले जिला स्वास्थ्य अधिकारी रायसेन द्वारा झोलाछाप चिकित्सक भगवानदास लोधी के क्लीनिक और मेडिकल दुकान को सील किया गया था। आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित परिसर में दोबारा अवैध रूप से गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, जिसकी शिकायतें ग्रामीणों द्वारा की जा रही थीं।
बाइक से पीछा कर कार रोकने और मारपीट का आरोप
ज्ञापन के मुताबिक, कवरेज के दौरान पत्रकार को देख लेने के बाद कुछ लोगों ने बाइक से उनकी कार का पीछा किया। आरोप है कि ग्राम भैसा तिगड्डे के पास ओवरटेक कर कार रुकवाई गई और उसकी चाबी निकाल ली गई। इसके बाद पत्रकार कृष्णा यादव और उनके भाई देवेश यादव को जबरन कार से बाहर निकालकर करीब आधा दर्जन लोगों ने लाठी-डंडों से मारपीट की, जिससे दोनों को चोटें आईं।
आरोप है कि मारपीट के बाद दोनों के मोबाइल फोन छीन लिए गए और उन्हें बल पूर्वक अपहृत कर जबरन बाइक पर बैठाकर ग्राम मोदकपुर ले जाया गया, जहां करीब ढाई घंटे तक एक कमरे में बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान मोबाइल का पासवर्ड लेकर कवरेज से संबंधित वीडियो और फोटो डिलीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
पुलिस के फोन से घबराए आरोपी, फिर मारपीट करने का आरोप
ज्ञापन में आगे बताया गया कि इसी दौरान पत्रकार के मोबाइल पर बेगमगंज थाना प्रभारी का फोन आया, जिसके बाद कथित तौर पर आरोपी घबरा गए। आरोप है कि इसके बाद दोनों के साथ दोबारा मारपीट की गई और उन पर अनर्गल आरोप लगाते हुए वीडियो बनाए गए। पत्रकार को बदनाम करने की धमकी दिए जाने की बात भी ज्ञापन में कही गई है।
बताया गया कि आरोपियों ने अपने बचाव के लिए स्वयं सुल्तानगंज पुलिस को सूचना देकर मौके पर बुलाया। पुलिस दोनों को आरोपियों के कब्जे से छुड़ाकर थाने ले गई। वहां पत्रकार ने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी और अपने शरीर पर आई चोटों के बारे में बताया।
मेडिकल जांच में भाई के हाथ में फ्रैक्चर
ज्ञापन के अनुसार, पुलिस ने पत्रकार कृष्णा यादव और उनके भाई देवेश यादव का मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें देवेश यादव के बाएं हाथ में फ्रैक्चर पाया गया। शरीर पर गंभीर चोटें आने की बात भी सामने आई। मामले में पुलिस द्वारा विभिन्न धाराओं के तहत करीब आधा दर्जन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
पत्रकारों ने आरोप लगाया कि मामला दर्ज होने के बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष अपने बचाव में पत्रकार के खिलाफ झूठी शिकायतें करवा रहा है। पत्रकारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन सौंपने वाले में प्रमुख रूप से वरिष्ठ पत्रकार शब्बीर अहमद, मनोज गुप्ता, हरि साहू, शरद शर्मा, राशिद मीर, आनंद शर्मा, उत्तम सिंह ठाकुर, विशाल शिल्पकार,अमजद खान, राजीव दुबे, शानू रैकवार, अजय गोयल, राशिद खान, गोलू कुराडिया, राहुल अहिरवार, हुसैन जावेद , अतुल दांतरे, सईद नादां आदि शामिल हैं।
शासकीय वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की भी मांग
ज्ञापन में आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले में तत्काल गिरफ्तारी और कठोर कानूनी कार्रवाई करने के साथ ग्राम मोदकपुर में खसरा नंबर 140/1 पर दर्ज शासकीय वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे की जांच कराने की मांग भी की गई है। पत्रकारों का कहना है कि उक्त भूमि पर मकान, मेडिकल दुकान और क्लीनिक संचालित किए जाने के आरोपों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा यदि अतिक्रमण प्रमाणित होता है, तो उसे हटाकर शासकीय भूमि को मुक्त कराया जाए।
पत्रकारों ने कहा कि पत्रकारों पर इस तरह के हमले स्वतंत्र पत्रकारिता और जनहित में की जाने वाली रिपोर्टिंग के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
शासकीय वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की भी मांग
ज्ञापन में आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले में तत्काल गिरफ्तारी और कठोर कानूनी कार्रवाई करने के साथ ग्राम मोदकपुर में खसरा नंबर 140/1 पर दर्ज शासकीय वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे की जांच कराने की मांग भी की गई है। पत्रकारों का कहना है कि उक्त भूमि पर मकान, मेडिकल दुकान और क्लीनिक संचालित किए जाने के आरोपों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा यदि अतिक्रमण प्रमाणित होता है, तो उसे हटाकर शासकीय भूमि को मुक्त कराया जाए।
पत्रकारों ने कहा कि पत्रकारों पर इस तरह के हमले स्वतंत्र पत्रकारिता और जनहित में की जाने वाली रिपोर्टिंग के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
