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संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ रैली ऐतिहासिक रही; जनसैलाब ने बुलंद की आदिवासी अधिकारों की आवाज़, जारी रहेगा चिता आंदोलन

  • जन संघर्ष समन्वय समिति मध्यप्रदेश ने किया जनसंघर्षों की एकजुटता का आह्वान; नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक श्री विक्रांत भूरिया एवं जनसंघर्ष समन्वय समिति, मध्यप्रदेश सहित अन्य संगठनों व मातृशक्ति के आग्रह पर अमित भटनागर का आमरण अनशन समाप्त कराया


पन्ना, मध्यप्रदेश
। ‘संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ रैली में उमड़े जनसैलाब ने आदिवासी अधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग को मजबूती से उठाया। रैली में मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार, विधायक श्री विक्रांत भूरिया, आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के राम नारायण कुररिया, जन संघर्ष समन्वय समिति मध्यप्रदेश के विजय कुमार, सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी (CFA) की दीपमाला पटेल सहित अनेक किसान एवं आदिवासी नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए संविधान, लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा की मांग की।



जन संघर्ष समन्वय समिति मध्यप्रदेश की ओर से शामिल विजय कुमार ने विभिन्न जनसंघर्षों को एकजुट करने का आह्वान किया। उन्होंने मझगाँव बाँध, रूंझ परियोजना, ललितपुर–सिंगरौली रेलमार्ग, पवई सिंचाई परियोजना और केन–बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित किसानों, आदिवासियों एवं विस्थापित परिवारों के सवालों को उठाते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर प्रभावित समुदायों के अधिकारों, आजीविका और सम्मान की अनदेखी नहीं की जा सकती। प्रभावित परिवारों को न्याय, उचित मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी किसानों, विस्थापित परिवारों और जल-जंगल-जमीन पर अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत समुदायों की लड़ाइयाँ अलग-अलग नहीं हैं। इन्हें साझा मंच पर लाकर व्यापक जनएकता मजबूत करनी होगी। जन संघर्ष समन्वय समिति मध्यप्रदेश इन सवालों पर राज्यभर में संघर्ष को आगे बढ़ाएगी।



रैली का एक प्रमुख घटनाक्रम पिछले 28 दिनों से आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता एवं चिता आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर का अनशन समाप्त होना रहा। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों सहित आदिवासी महिलाओं के आग्रह पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनका अनशन समाप्त कराया। इस घटनाक्रम के साथ ही प्रभावित परिवारों के अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया गया।

रैली में वक्ताओं और प्रदर्शनकारियों ने पन्ना जिले में प्रभावित परिवारों के साथ हो रहे व्यवहार, प्रशासनिक जवाबदेही तथा कानून एवं संविधान के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के सवाल उठाए। लोगों ने मांग की कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान संवाद, न्याय और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाए।



वहीं जय किसान संगठन, मध्यप्रदेश के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि अमित भटनागर का आमरण अनशन समाप्त होना आंदोलन का अंत नहीं है। चिता आंदोलन जारी रहेगा और प्रभावित किसानों, आदिवासी परिवारों तथा विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई को व्यापक जनएकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। संविधान प्रदत्त अधिकारों, ग्रामसभाओं की शक्तियों, आजीविका और सम्मान की रक्षा के लिए सभी किसान संगठनों, आदिवासी संगठनों, सामाजिक आंदोलनों और लोकतांत्रिक ताकतों से एकजुट होने की अपील की गई।