नई दिल्ली
सीबीआई बनाम ममता बनर्जी विवाद में सुप्रीम कोर्ट
ने सुनवाई करते हुए कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को सीबीआई के सामने पेश होने
और जांच में सहयोग देने का आदेश दिया है। इससे पहले में सीबीआई ने सुप्रीम
कोर्ट में 14 पेज का हलफनामा पेश किया था। इस हलफनामे में सीबीआई ने कोर्ट
को सबूत नष्ट किए जाने के बारे में जानकारी दी। सीबीआई ने पुलिस कमिश्नर
के खिलाफ कोई सबूत न देते हुए, इस बात के सबूत दिए हैं कि पुलिस कमिश्नर
सबूत नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। सीबीआई ने कोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक
रेकॉर्ड नष्ट करने के सबूत भी कोर्ट में दिए हैं।
सीडीआर में अंतर
सीबीआई ने अपने हलफनामें में कहा है कि सीबीआई ने सर्विस प्रोवाइडर से
ऑरिजनल सीडीआर हासिल की है। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सर्विस
प्रोवाइडर से मिली सीडीआर और राजीव कुमार द्वारा उपलब्ध कराई गई सीडीआर की तुलना की गई तो साफ हो गया कि राजीव कुमार द्वारा उपलब्ध कराई गई सीडीआर से छेड़छाड़ की गई है।
SIT ने जांच में किया टालमटोल
सीबीआई ने हलफनामे में कहा है कि, पश्चिम बंगाल सरकार ने 26-04-13 को
एक आदेश जारी कर पूरे राज्य में चिटफंड के सारे मामले और जांच एसआईटी को
सौंपने का फैसला किया। साथ ही साथ कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका
दाखिल की गई थी जिसमें कोर्ट ने एसआईटी हर महीने जांच रिपोर्ट दाखिल करने
का आदेश दिया था। हलफनामे में कहा गया है कि हाई कोर्ट के लगातार निगरानी
के बाद भी एसआईटी द्वारा जांच में टालमटोल करना एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा
है। स्थानीय अधिकारियों ने जांच को प्रभावित किया और सबूतों को नष्ट करने
की कोशिश की।
आरोपियों को बचाने की कोशिश
हलफनामे में कहा गया है कि राजीव कुमार ने कई समन भेजे जाने के बाद भी
जांच में सहयोग नहीं किया। राजीव कुमार ने सीडीआर के साथ भी छेड़छाड़ की।
सीबीआई ने दावा किया कि राजीव कुमार के नेतृत्व में पूरी एसआईटी ने जांच
आगे बढ़ाने की बजाए आरोपियों को बचाने की कोशिश की।
इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते
हुए कहा था कि सीबीआई कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ सबूत लाकर दे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था यदि राजीव कुमार यदि सबूतों को मिटाने की कोशिश कर
रहे हैं तो सीबीआई उनके खिलाफ सबूत लाकर दे, हम उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई
करेंगे कि वह पछताएंगे।
सीबीआई के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में सलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश
हुए थे। उन्होंने रविवार के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा, 'वेस्ट बंगाल
पुलिस द्वारा सीबीआई के जॉइंट कमिश्नर के घर पर पहरा लगाकर उन्हें और उनके
परिवार को बंधक बना लिया गया था। फिर सीबीआई के अंतरिम डायरेक्टर द्वारा कई
फोन कॉल करने के बाद फोर्स को वहां से हटाया गया।'
कोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पेश सीनियर वकील अभिषेक मनु
सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कोलकाता कमिश्नर चिट फंड केस में आरोपी
नहीं बल्कि सिर्फ एक गवाह हैं। इसपर बेंच ने मंगलवार की तारीख देते हुए कहा
कि राज्य सरकार अपने बचाव में तथ्य तैयार रखे। आपको यह भी बता दें कि
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट
राजीव कुमार को सरेंडर या पूछताछ के लिए उपलब्ध होने और राज्य के चीफ
सेक्रटरी मलय कुमार डे, डीजीपी वीरेंद्र कुमार और राजीव कुमार के खिलाफ
न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दे।
