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दो साल में छह बार हिरासत में लिया गया था आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार

श्रीनगर 
जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकवादी हमले को अंजाम देने वाला जैश-ए-मोहम्‍मद आतंकी आदिल अहमद डार सितंबर 2016 से मार्च 2018 के बीच छह बार पत्‍थरबाजी और आतंकवादी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा की मदद के आरोप में हिरासत में लिया गया था। हालांकि, हर बार आदिल अहमद को बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया।

एक साथी और भी था...

आईबी और पुलिस के अधिकारियों ने हमारे सहयोगी अखबार मुंबई मिरर को इसकी जानकारी दी। पुलवामा जिले के गुंडीबाग गांव का रहने वाला आदिल दो साल के अंदर छह बार हिरासत में लिया गया, जो दर्शाता है कि वह एक ऐसा शख्‍स था जिस पर सुरक्षा एजेंसियों को नजर रखने की जरूरत थी। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्‍या खुफिया खामियों की वजह से वह सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने में सफल रहा? 

'आतंकियों को छिपने में मदद करता था आदिल' 
हालांकि, दोनों अधिकारियों ने स्‍पष्‍ट किया कि आदिल पर कभी भी औपचारिक रूप से आरोप नहीं लगाया और न ही एफआईआर दर्ज की गई। बता दें कि आदिल ने 150 किलोग्राम विस्‍फोटक के साथ अपनी कार को जम्‍मू-कश्‍मीर नैशनल हाइवे पर सीआरपीएफ की बस से टकरा दी थी। इसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। पुलवामा के पुलिस अधिकारी ने बताया कि आदिल ने वर्ष 2016 में एक ओवर ग्राउंड वर्कर के रूप में काम करना शुरू किया था। 
उन्‍होंने बताया कि आदिल लश्‍कर आतंकियों को छिपने में मदद करता था। इसके अलावा वह लश्‍कर कमांडरों और उनके साथ जुड़ने की इच्‍छा रखने वाले स्‍थानीय युवकों के बीच मध्‍यस्‍थ का काम भी करता था। अधिकारी ने बताया कि आदिल के परिवार के कुछ सदस्‍यों के आतंकवादियों के संबंध हैं। अधिकारी ने कहा, 'आदिल के जैश से जुड़ने से पहले हमने उसे सुरक्षा बलों पर पत्‍थर फेंकने के आरोप में दो बार हिरासत में लिया था। इसके अलावा लश्‍कर आतंकियों को सहयोग देने के आरोप में उसे 4 बार हिरासत में लिया गया था।' 

"आदिल के जैश से जुड़ने से पहले उसे सुरक्षा बलों पर पत्‍थर फेंकने के आरोप में दो बार हिरासत में लिया गया था। साथ ही लश्‍कर आतंकियों को सहयोग देने के आरोप में उसे 4 बार हिरासत में लिया गया था।"-आईबी अधिकारी

'सुरक्षा बलों के खिलाफ प्रदर्शनों में हिस्‍सा लिया' 
अधिकारी ने कहा कि आदिल ने सुरक्षा बलों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में हिस्‍सा लिया था, जिसमें वह घायल हो गया था। उधर, आईबी के अधिकारी ने बताया कि आदिल मंजूर से बहुत ज्‍यादा प्रभावित था। मंजूर की मौत के बाद वह पूरी तरह से आतंकवादियों के साथ मिल गया। उन्‍होंने कहा, 'एक शीर्ष लश्‍कर कमांडर के साथ मंजूर की मौत के बाद आदिल अपने गृह कस्‍बे से लापता हो गया। उसे और कुछ अन्‍य स्‍थानीय युवकों को पाकिस्‍तान के जैश कमांडर ओमर हाफिज ने ट्रेनिंग दी। उसे कामरान और अब्‍दुल राशिद के नाम से भी जाना जाता है।' 

आईबी अधिकारी ने बताया कि हाफिज पिछले साल घाटी में आया था और उसे आत्‍मघाती हमले के लिए ट्रेनिंग देने का काम दिया गया था। उन्‍होंने कहा, 'नए लोगों को लश्‍कर-ए-तैयबा में शामिल होने के लिए शर्त है कि उन्‍हें पुलिसवालों की हत्‍या या उनकी बंदूक को छीनना होगा। इससे आदिल लश्‍कर से न जुड़कर जैश-ए-मोहम्‍मद में शामिल हो गया, जहां ऐसी कोई शर्त नहीं है।' जैश ने पहले 9 फरवरी को अफजल गुरु की मौत के दिन इस हमले को अंजाम देने की साजिश रची थी, लेकिन खराब मौसम के कारण ऐसा नहीं हो सका।