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नाबार्ड से किसानों की भलाई के लिए मिले एक हजार करोड़ रुपए देशभर के 10 हजार से ज्यादा एफपीओ ने हड़पे

  • भारतीय किसान संघ ने की सीबीबीओ की तत्काल फंडिंग रोकने और किसानों के खाते में डायरेक्ट सब्सिडी ट्रांसफर की मांग

  • माही फेडरेशन के साथ नाबार्ड करे काम, ताकि वास्तविक किसानों तक पहुंच सके सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ



भोपाल। भारतीय किसान संघ ने कहा है कि नाबार्ड से अनुदान पाने के लिए गठित एफपीओ (फॉर्मर प्रोड्यूसर आॅर्गनाइजेशन) ने एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हड़पे हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश के 400 एफपीओ सहित देशभर के दस हजार एफपीओ को दिया जाने वाला अनुदान तत्काल रोका जाकर किसानों के खाते में डायरेक्ट सब्सिडी ट्रांसफर की जाए। खासकर सारे सीबीबीओ (क्लस्टर बेस्ड बिजनेस आॅर्गनाईजेशन) को की गई अब तक की फंडिंग की जांच करके सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही संघ ने मध्यप्रदेश में नकली खाद, बीज और पेस्टीसाइड्स के मामलों में एफआईआर दर्ज कराने का समर्थन किया है।


इस बारे में भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष के. साई. रेड्डी, माही फेडरेशन के डायरेक्टर ऋषि गुप्ता, नाफेड डायरेक्टर अशोक कुमार ठाकुर और किसान संघ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हरपाल सिंह ने पत्रकारवार्ता में कहा कि एफपीओ का गठन किसानों की भलाई के लिए किया गया था, लेकिन यह सिर्फ सरकारी राशि को हड़पने का माध्यम बन गए हैं। ऐसे में एफपीओ के गठन से लेकर वर्तमान तक सीबीबीओ को दी गई अनुदान राशि और उसके उपयोग की जांच की जाए, क्योंकि किसानों की आड़ में व्यापारी, बिल्डर और ट्रांसपोर्टर तक सदस्य बन गए हैं। ऐसे में एफपीओ को नाबार्ड के माध्यम से लाखों रुपए के अनुदान पर तत्काल रोक लगाई जाकर किसानों के खाते में डायरेक्टर अनुदान की राशि ट्रांसफर की जाए।
 


नाफेड डायरेक्टर अशोक कुमार ठाकुर ने कहा कि किसानों की भलाई के लिए माही फेडरेशन के साथ नाबार्ड को आना चाहिए, क्योंकि अभी सीबीबीओ को जो अनुदान मिलता है, उस राशि का मिसयूज हो रहा है। वास्तविक किसानों तक लाभ नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में अनुदान की जांच के साथ ही बैंक खातों को सीज किया जाए। ठाकुर ने कहा कि इस बारे में किसान संघ ने 2024 से ही अभियान चला रखा है। संघ की कोशिश है कि जांच होकर किसानों के नाम पर राशि हड़पने वालों को सजा मिले और वसूली हो सके। वहीं सरकार की योजनाओं का लाभ असली किसानों तक पहुंच सके।
 


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माही फेडरेशन के डायरेक्टर ऋषि गुप्ता ने कहा कि एफपीओ के बारे में गांव-गांव बताने की जरुरत है, ताकि सभी किसानों तक सरकार की कल्याणकारी नीतियों की जानकारी पहुंच सके। साथ ही अनुदान वाली योजनाओं से किसान जुड़ सकें। उन्होंने बताया कि माही फेडरेशन और अखिल भारतीय किसान संघ के साथ अन्य संगठनों की हुई बैठक में तय किया गया है कि एफपीओ को दिए जाने वाले अनुदान में करोड़ों के घोटाले ही जांच जल्द शुरु करवाई जाए, साथ ही किसानों के खाते में राशि शिफ्ट की जाए। साथ ही माही फेडरेशन के साथ नाबार्ड आए, ताकि माही के डेढ हजार एफपीओ के माध्यम से वास्तविक किसानों तक लाभ पहुंच सके। गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में नकली कीटनाशकों और खाद को लेकर मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री से बात की जाएगी, ताकि ऐसे मामलों को सैंपल जांच के नाम पर लटकाकर क्लीनचिट देना बंद हो। साथ ही किसानों की समस्त मूंग की उपज को सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर खरीदने के पक्ष में कहा कि सरकार ने एमएसपी तय की है तो इस समस्या का समाधान भी करना चाहिए, ताकि किसानों को नुकसान नही हो।